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लोक चौपाल में जीवंत हुई कबीर की लोकचेतना, कबीर की प्रासंगिकता पर की चर्चा

लखनऊ। संत कबीर जयंती की पूर्व संध्या पर रविवार को लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा प्रियदर्शिनी कॉलोनी स्थित विधायक कार्यालय में आयोजित लोक चौपाल में कबीर की लोकचेतना, समरसता और सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा हुई। शुरुआत चौपाल प्रभारी अर्चना गुप्ता ने मंगलाचरण एवं कबीर दोहा गायन से की।

मुख्य वक्ता डॉ. आशुतोष कृष्णा ने कहा कि संत कबीर का दर्शन केवल भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरण, मानवीय समानता और आत्मबोध का भी सशक्त संदेश देता है। कबीर ने जाति, पंथ और आडंबर से ऊपर उठकर सत्य, प्रेम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की स्थापना का आह्वान किया। प्रो. उषा बाजपेयी ने कबीर की प्रासंगिकता पर चर्चा की।

चौपाल में कबीर के पदों पर आधारित नृत्य तथा गायन विशेष आकर्षण रहे। कुमाऊं कोकिला विमल पन्त ने कहत कबीर सुनो भाई साधो, नीरा मिश्रा ने कैसे दिन कटिहें जतनिया बताय देओ, अरुणा उपाध्याय ने रहना नहिं देस बिराना है, चित्रा श्रीवास्तव ने पिया ऊंची रे अटरिया तोरी देखन चली, अलका चतुर्वेदी ने मन लागो मेरो यार फकीरी में, प्रीति श्रीवास्तव ने राम भजा सोई जीता रे, बबिता साहू ने या विधि मन को लगावे, देवाश्री पवार ने झीनी झीनी बीनी चदरिया सुनाया। सामूहिक प्रस्तुति में कौन ठगवा नगरिया लूटल हो तथा चलो गोरी आपन चुनरिया बचाई के जैसे कबीर के लोकप्रिय पदों का सुमधुर गायन एवं मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया गया। 

इस अवसर पर संस्थान की संरक्षक सरिता अग्रवाल, निवेदिता भट्टाचार्य, गायत्री डेविड, तुषारकान्ति भट्टाचार्य, अंजलि, रागिनी अग्रवाल, डा.एस.के.गोपाल, गौरव गुप्ता, सतीश मिश्र, संजीव अग्रहरि, अम्बरीश सिंह, शैलेन्द्र मौर्य, गोविन्द सिंह सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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