Homeजिला / लोकल (Local News)राज्यसभा में अमित शाह की मौजूदगी पर किरेन रिजिजू का जवाब

राज्यसभा में अमित शाह की मौजूदगी पर किरेन रिजिजू का जवाब


राज्यसभा में हंगामे के बाद सभा सोमवार तक के लिए स्थगित

नई दिल्ली। राज्यसभा में शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग को लेकर विपक्ष के विरोध पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि कोई मंत्री सदन में कब आएगा। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा के सभापति ने किसी मंत्री को सदन में मौजूद रहने का कोई निर्देश नहीं दिया है।
रिजिजू ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि गृह मंत्री अमित शाह सुबह से ही संसद में मौजूद रहते हैं। हालांकि, किसी मंत्री का सदन में आना उस समय के निर्धारित कामकाज पर निर्भर करता है। यदि उनके मंत्रालय से संबंधित कोई कार्य सूचीबद्ध होता है, तभी मंत्री का सदन में उपस्थित होना आवश्यक होता है।
उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने किसी मंत्री को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश नहीं दिया है। रिजिजू का यह बयान विपक्ष की ओर से गृह मंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने की लगातार मांग के बीच आया।
दरअसल, 6 अगस्त को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने संसदीय कार्य मंत्री से विपक्ष की मांग को गृह मंत्री तक पहुंचाने को कहा था। सभापति ने कहा था कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी सदस्य गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने रिजिजू से विपक्ष की भावनाओं को गृह मंत्री तक पहुंचाने का आग्रह किया था।
इससे पहले राज्य सभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सभा की कार्यवाही शुरू करते हुए भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त 2026 को ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ है। यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक पड़ाव था।
उन्होंने कहा कि 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन ने देश की आजादी की लड़ाई को नई गति दी। गांधीजी के ‘करो या मरो’ के आह्वान ने करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
सभापति ने कहा कि ब्रिटिश शासन के कठोर दमन, जेल और तमाम कठिनाइयों के बावजूद स्वतंत्रता सेनानियों ने साहस, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का परिचय दिया। उनके त्याग और बलिदान ने स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया और 1947 में देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर सदन उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेकर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
सभापति ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की देशभक्ति, एकता, त्याग और समर्पण के आदर्श आज भी मजबूत, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के लिए प्रेरणा देते हैं। इसके बाद उन्होंने सदन के सभी सदस्यों से स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों और वीर बलिदानियों की स्मृति में अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर मौन रखने का आग्रह किया।
उसके बाद सदन में हंगामे के बीच शून्य काल की कार्यवाही शुरू की। हंगामे के कारण पहले कार्यवाही सुबह 12 बजे तक के स्थगित की गई फिर प्रश्न काल शुरू होते ही विपक्ष के हंगामे केसाथ सत्ता पक्ष के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया । उसके बाद सभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

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