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ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग से किशनगंज रेलखंड हुआ हाईटेक, ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगी

किशनगंज। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने रेल सुरक्षा और परिचालन क्षमता को नई मजबूती देते हुए पांजीपाड़ा से सूर्यकमल सेक्शन के बीच आधुनिक ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली लागू कर दी है।

मंगलवार से शुरू हुई इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए अब ट्रेनों का परिचालन अधिक सुरक्षित, तेज और समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस नई व्यवस्था से पूरे रूट की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, नव स्थापित ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सेक्शन में कुल पांच स्टेशन शामिल किए गए हैं। इनमें तीन स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग तथा दो स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग प्रणाली कार्यरत है। ट्रेनों के सुरक्षित और सुचारु परिचालन के लिए पूरे सेक्शन में चार विशेष ऑटो सिग्नल हट भी स्थापित किए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पांजीपाड़ा और सूर्यकमल के बीच कुल 14 रेलवे फाटक मौजूद हैं। इनमें से छह अत्यधिक व्यस्त लेवल क्रॉसिंग गेटों को आधुनिक स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली से इंटरलॉक किया गया है।

इससे ट्रेन संचालन के दौरान मानवीय त्रुटि की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। रेलवे ने ट्रेनों की सटीक लोकेशन की निगरानी के लिए 196 मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर डिटेक्शन प्वाइंट तथा 40 नए ऑटोमेटिक सिग्नल भी लगाए हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए एक के पीछे दूसरी ट्रेन को अधिक दक्षता के साथ चलाया जा सकेगा।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीकी उन्नयन से ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी आएगी तथा समयपालन में बड़ा सुधार होगा। तकनीकी विशेषज्ञों ने इसे रेल सुरक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इससे दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी कम होगी।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में संरक्षा एवं सिग्नलिंग उन्नयन के तहत कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना की सफलता के बाद भविष्य में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का विस्तार गुवाहाटी तक किए जाने की योजना है, जिससे पूरे नॉर्थ-ईस्ट रेलवे नेटवर्क को अत्याधुनिक बनाया जा सकेगा।

 

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