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ईपीएफ और न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर 3 मई को केंद्र से होगी चर्चा: श्रम मंत्री

लखनऊ। शुक्रवार मई दिवस के अवसर पर यूपी के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने बड़ा संकेत देते हुए कहा कि वह 3 मई को केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडवीया से ईपीएफ की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के मुद्दे पर बात करेंगे। यह घोषणा प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में की गई।

यूनियन की प्रमुख मांग है कि भविष्य निधि (पीएफ) की न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किया जाए। मंत्री राजभर ने बताया कि इस संबंध में यूनियन पहले ही ज्ञापन दे चुकी है और अब केंद्र स्तर पर बातचीत शुरू की जा रही है। उन्होंने यूनियन को प्रदेशभर के पत्रकारों के साथ एक बड़े संवाद कार्यक्रम का प्रस्ताव भी दिया, जिसमें वे स्वयं दो-तीन घंटे तक चर्चा के लिए उपलब्ध रहेंगे।

कार्यक्रम में यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रादेशिक अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक मांगपत्र का उल्लेख किया। इस मांगपत्र में पत्रकारों के लिए पेंशन, सुरक्षा कानून, पीजीआई में चिकित्सा सुविधा, भूखंड आवंटन, आर्थिक सहायता की स्थायी व्यवस्था और ट्रेन किराए में छूट बहाल करने जैसी मांगें शामिल हैं। विशिष्ट अतिथि एमएलसी पवन सिंह चौहान ने पत्रकारिता के सामने मौजूद चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सच लिखने का साहस ही पत्रकारिता की पहचान है और पत्रकारों से अपील की कि वे समाज के वंचित और पीड़ित वर्ग की आवाज मजबूती से उठाते रहें।

यूपी प्रेस क्लब के अध्यक्ष रविंद्र कुमार सिंह ने पत्रकारों के सामने आ रही मुश्किलों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन की सामान्य आलोचना भी अब पत्रकारों के लिए जोखिम भरी हो गई है। खबरों को रोका जा रहा है और पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। हिंद मजदूर महासभा के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर मिश्र ने कहा कि पत्रकारों के वेज बोर्ड बंद हो गए हैं और कोरोना के बाद सुविधाएं भी घट गई हैं। 

उन्होंने चेताया कि अब अधिकारों के लिए एकजुट संघर्ष जरूरी है।कार्यक्रम में कई पत्रकारों और पदाधिकारियों ने एक सुर में कहा कि समय आ गया है जब संगठन मजबूत होकर पत्रकार हितों की लड़ाई जमीन पर लड़े। संचालन प्रेमकांत तिवारी ने किया और बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।

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