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बस्ती जिले में इस वर्ष जुलाई माह में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद धान की रोपाई का कार्य जारी है। पिछले वर्ष जुलाई में 247.00 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि इस वर्ष अब तक केवल 151.7 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। बारिश की कमी के कारण किसानों को खेतों में पंपिंग सेट और नलकूपों से सिंचाई कर धान की रोपाई करानी पड़ रही है। जिले के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में किसान समय पर रोपाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त खर्च उठा रहे हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय डीजल और बिजली चालित पंपिंग सेट का सहारा ले रहे हैं। इससे खेती की लागत बढ़ गई है, लेकिन किसान फसल को समय पर तैयार करने में जुटे हैं। किसानों का कहना है कि अभी खेतों में सिंचाई की व्यवस्था कर रोपाई का कार्य किया जा रहा है, लेकिन यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो लगातार सिंचाई करना महंगा साबित होगा। डीजल, बिजली और मजदूरी का खर्च पहले ही बढ़ चुका है, ऐसे में बेहतर बारिश होने से किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। कृषि जानकारों, वीरेंद्र पांडेय और कल्याण चौधरी के अनुसार, धान की फसल के लिए शुरुआती चरण में पर्याप्त नमी आवश्यक होती है। फिलहाल सिंचाई के सहारे रोपाई जारी है, लेकिन मानसून की अच्छी बारिश होने से फसल की बढ़वार बेहतर होगी और किसानों की लागत भी कम होगी। बारिश की सुस्त रफ्तार के बीच जिले के अन्नदाता की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं। किसान झमाझम बारिश की कामना कर रहे हैं ताकि पंपिंग सेट पर निर्भरता कम हो, खेती की लागत घटे और धान की बेहतर पैदावार सुनिश्चित हो सके।
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बस्ती में जुलाई में कम बारिश:पंपिंग सेट से धान की रोपाई, किसान कर रहे अच्छी बरसात का इंतजार
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