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मूक-बधिर बच्चों से संवाद सीख रही लखनऊ पुलिस, 140 पुलिसकर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

लखनऊ। संवेदनशील और जनहितैषी पुलिसिंग को मजबूत बनाने की दिशा में Uttar Pradesh Police के पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने एक सराहनीय पहल की है। मूक-बधिर दिव्यांग बालकों एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों से सौहार्दपूर्ण संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से रिजर्व पुलिस लाइन्स में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 140 पुलिसकर्मियों को व्यवहारिक और मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया।

यह कार्यशाला उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महानिदेशक के निर्देशों के क्रम में पुलिस आयुक्त Amrendra Kumar Sengar के निर्देशन में आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग शाखा, पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा किया गया।

कार्यशाला में महिला हेल्प डेस्क पर तैनात महिला आरक्षियों, बाल कल्याण अधिकारियों और पिंक बूथ पर नियुक्त पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को यह समझाना था कि मूक-बधिर एवं दिव्यांग बच्चों के साथ संवाद के दौरान किस प्रकार संवेदनशील व्यवहार, धैर्य और विशेष संप्रेषण तकनीकों का उपयोग किया जाए।

विशेषज्ञों ने सिखाई सांकेतिक भाषा और संवाद तकनीक

प्रशिक्षण सत्र के मुख्य प्रशिक्षक डॉ. विजय कुमार वर्मा और उनकी टीम ने पुलिसकर्मियों को बताया कि मूक-बधिर बच्चों से संवाद करते समय चेहरे के भाव, बॉडी लैंग्वेज और सकारात्मक व्यवहार की अहम भूमिका होती है। विशेषज्ञों ने यह भी समझाया कि ऐसे बच्चों से बातचीत के दौरान भयमुक्त वातावरण तैयार करना बेहद जरूरी है ताकि वे अपनी समस्याओं और भावनाओं को सहज रूप से व्यक्त कर सकें।

कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा (Sign Language) की प्रारंभिक तकनीकों, बाल संरक्षण कानूनों, संकट की स्थिति में काउंसलिंग और दिव्यांग बच्चों के साथ मानवीय व्यवहार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

संवेदनशील पुलिसिंग को मिलेगा बढ़ावा

कार्यक्रम में शामिल महिला आरक्षियों और बाल कल्याण अधिकारियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताया। प्रतिभागियों का कहना था कि इस प्रकार की कार्यशालाएं पुलिस और आमजन के बीच विश्वास बढ़ाने के साथ-साथ पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील बनाने में मदद करेंगी।

पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों की सुरक्षा एवं सहयोग को प्राथमिकता देते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे।

यह कार्यशाला इस बात का उदाहरण बनी कि आधुनिक पुलिसिंग केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के प्रति सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

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