श्रावस्ती के नासिरगंज स्थित मरहूम शाकिर हुसैन के अज़ाखाने में 18 सफ़र को मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया। इस मजलिस में बड़ी संख्या में मोमिनीन ने भाग लिया और नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) तथा कर्बला के शहीदों की याद में पुरसा पेश किया। मजलिस को ज़ाकिर अम्मार रिज़वी ने संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कर्बला के पैगाम पर प्रकाश डाला। रिज़वी ने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) का बलिदान किसी एक दौर के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने का प्रतीक है। उन्होंने 18 सफ़र के संदर्भ में अहले बैत के बंदियों (क़ैदियों) पर हुए अत्याचारों का वर्णन किया। इसे सुनकर अज़ादारों की आंखें नम हो गईं और पूरा अज़ाखाना ‘या हुसैन’ के नारों से गूंज उठा। मजलिस के समापन पर नौहाख़्वानी और मातम किया गया। स्थानीय अज़ादारों ने अहले बैत के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। अंत में देश में अमन-चैन, भाईचारे और प्रगति की दुआ के साथ मजलिस संपन्न हुई।
मरहूम शाकिर हुसैन के अज़ाखाने में मजलिस:18 सफ़र को इमाम हुसैन की याद में पुरसा पेश
RELATED ARTICLES
Recent Comments
on Hello world!












