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चित्रकूट मंडी घोटाले में ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई, ₹8 करोड़ गबन के दो मुख्य आरोपी अफसर गिरफ्तार

लखनऊ/चित्रकूट। चित्रकूट जनपद के कर्वी स्थित विशिष्ट मंडी परिषद के निर्माण कार्य में लगभग 8 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी धन के कथित गबन के बहुचर्चित मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू), उत्तर प्रदेश ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात थे और उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग तथा अनियमित भुगतान कराने का आरोप है।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष 2014 में चित्रकूट के कर्वी स्थित विशिष्ट मंडी के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया के माध्यम से कार्यदायी संस्था का चयन किया गया था। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान तत्कालीन उपनिदेशक (निर्माण) और सहायक लेखाधिकारी ने कार्यदायी संस्था मेसर्स ग्लेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, गाजियाबाद के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं कीं।

जांच में सामने आया कि अभियुक्तों ने निर्माण कार्य का वास्तविक सत्यापन और वित्तीय परीक्षण किए बिना नियमों के विपरीत अधिक माप (ओवर मेजरमेंट), अनुचित मूल्यांकन तथा अनधिकृत भुगतान को स्वीकृति दी। इसके चलते कार्यदायी संस्था को लगभग 8 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

इस मामले में वर्ष 2019 में चित्रकूट के कोतवाली नगर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में 22 जून 2021 के शासनादेश के अनुसार मामले की विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को सौंप दी गई।

ईओडब्ल्यू ने दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों, तकनीकी परीक्षण तथा वित्तीय अभिलेखों की गहन जांच के बाद दोनों अधिकारियों की भूमिका प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की गई, लेकिन दोनों गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबे समय से फरार चल रहे थे।

ईओडब्ल्यू की टीम ने तकनीकी विश्लेषण, खुफिया सूचना और लगातार निगरानी के आधार पर 13 जुलाई 2026 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अशोक कुमार, तत्कालीन उपनिदेशक (निर्माण), राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, बांदा तथा सतीश कुमार यादव, तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी, राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, बांदा शामिल हैं।

ईओडब्ल्यू ने बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या संबंधित व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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