डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम वासा दरगाह में सोमवार रात 10 बजे मोहर्रम की छठी तारीख के अवसर पर एक मर्सिया मजलिस का आयोजन किया गया। यह मजलिस इंजीनियर इमरान लतीफ के आवास पर हुई, जिसे उत्तराखंड से आए मौलाना आज़म हुसैन ने संबोधित किया। मजलिस की शुरुआत शायरों द्वारा कलाम पेश करने से हुई। इसमें गुलरेज़ रिज़वी भोपाली, ख़ुलूस हल्लौरी, आलम हल्लौरी और इमरान लतीफ जैसे शायरों ने इमाम हुसैन की शान में अपने कलाम प्रस्तुत किए। इसके बाद मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना आज़म हुसैन ने कहा कि अली नमाज़ हैं और हम सब नमाज़ी हैं। उन्होंने बताया कि मजलिस में आने से शिक्षा का ज्ञान प्राप्त होता है और कर्बला दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देती है। मौलाना ने अल्लाह के फरमान का जिक्र करते हुए कहा कि इमाम हुसैन का जिक्र सुनना एक इबादत है। मौलाना आज़म ने आगे कहा कि इमाम हुसैन और उनके इकहत्तर साथियों ने कर्बला में भूखे-प्यासे रहकर शहादत देकर यह साबित कर दिया कि हुसैन ने कर्बला में हिंदुस्तान को याद किया था और यहां आने की इच्छा व्यक्त की थी। मजलिस के आखिर में मौलाना ने इमाम हुसैन के भाई हज़रत मुस्लिम के दोनों बेटों के मसाइब बयान किए, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। मजलिस का संचालन अज़ीम हल्लौरी ने किया।
डुमरियागंज में मोहर्रम की मर्सिया मजलिस आयोजित:मौलाना आज़म हुसैन ने इमाम हुसैन के बलिदान पर प्रकाश डाला
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