HomeHealth & Fitnessनेपाल में भारी बारिश से उफनाई मेची नदी, सीमावर्ती गांवों पर मंडराया...

नेपाल में भारी बारिश से उफनाई मेची नदी, सीमावर्ती गांवों पर मंडराया कटाव का खतरा

किशनगंज। नेपाल के तराई एवं पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर भारत-नेपाल सीमा पर बहने वाली मेची नदी में देखने को मिल रहा है।नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के साथ-साथ सीमावर्ती इलाकों में कटाव भी गंभीर रूप धारण करता जा रहा है। इससे ठाकुरगंज प्रखंड के कई गांवों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों के अनुसार मेची नदी लगातार भारतीय भूभाग का कटाव कर रही है और कई स्थानों पर नदी आबादी वाले क्षेत्रों के बेहद करीब पहुंच गई है।

कुछ गांवों में नदी और बस्ती के बीच की दूरी महज 100 से 200 मीटर रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटाव की यही रफ्तार जारी रही तो भातगांव पंचायत के बक्सरभिट्ठा, ठिकाटोली, लकड़ी डिपो, थारोधाधनी, नीमुगुड़ी, पासवान टोला, आदिवासी टोला और नगराडूबा सहित कई गांवों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

मेची नदी के बढ़ते जलस्तर ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 100 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि कटाव की जद में है। नदी किनारे बड़े पैमाने पर चाय, धान और केला की खेती होती है। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो उनकी फसलें नदी में समा सकती हैं, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। कटाव का असर सीमा सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है।

ग्रामीणों ने बताया कि 41वीं वाहिनी एसएसबी के बक्सरभिट्ठा, नीमुगुड़ी और नगराडूबा बीओपी भी खतरे की जद में हैं। पिछले वर्ष भारत-नेपाल सीमा को चिह्नित करने वाला एक सीमा स्तंभ कटाव के कारण नदी में बह गया था, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेपाल की ओर कराए गए कटावरोधी कार्यों के कारण नदी का दबाव भारतीय क्षेत्र की तरफ बढ़ गया है। इससे नदी की धारा में बदलाव आया है और भारतीय भूभाग में कटाव तेज हो गया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कटावरोधी कार्य शुरू कराने तथा स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि सीमावर्ती गांवों, कृषि भूमि और सीमा सुरक्षा चौकियों को सुरक्षित रखा जा सके।

 

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments