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सोने से पहले मोबाइल? बिस्तर पर फोन की आदत बढ़ा रही है आपका वजन

आजकल के लाइफस्टाइल में हम अक्सर सोने से ठीक पहले मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं। हेल्थ एक्पर्टस की मानें तो इनसे निकलने वाली नीली जिसे हम ब्लू लाइट कहते हैं, हमारे दिमाग को यह सिग्नल देती है कि अभी दिन है। इस वजह से नींद लाने वाला हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन शरीर में रुक जाता है। अब इससे न केवल आपके नींद की क्वालिटी खराब होती है बल्कि शरीर की एनर्जी खर्च करने की प्रक्रिया, मेटाबॉलिज्म भी धीमी पड़ जाती है।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) से जुड़ी विभिन्न रिसर्च में यह पाया गया है कि नींद की कमी सीधे तौर पर ‘घ्रेलिन’ जो कि हमारे शरीर में भूख लगने वाले हार्मोन है, को बढ़ाता है और ‘लेप्टिन’ जो कि पेट भरने का अहसास कराने वाला हार्मोन है, उसको कम करती है। जब आप देर रात तक स्क्रीन देखते हैं, तो आपको बेवजह की भूख या लेट नाइट क्रेविंग लगती है, जो अक्सर हाई-कैलोरी स्नैक्स के रूप में मोटापे का कारण बनती है।

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रिसर्च और वैज्ञानिक आधार

कई प्रतिष्ठित संस्थानों की स्टडीज इस बात की पुष्टि करती हैं कि डिजिटल स्क्रीन वजन बढ़ाने में सहायक का काम करती हैं। हमारी बॉडी क्लॉक जिसे मेडिकल भाषा में सर्कैडियन रिदम कहते हैं, स्क्रीन की रोशनी से भ्रमित हो जाती है। जब शरीर को लगता है कि दिन है, तो वह फैट बर्निंग मोड की जगह फैट स्टोरेज मोड में चला जाता है।

  • नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की स्टडी: शोधकर्ताओं ने पाया कि रात में नीली रोशनी के संपर्क में आने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिससे शरीर ग्लूकोज को सही से प्रोसेस नहीं कर पाता और फैट जमा होने लगता है।
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH): इनकी एक रिसर्च के अनुसार, जो लोग बेडरूम में लाइट या स्क्रीन चलाकर सोते हैं, उनमें वजन बढ़ने की संभावना उन लोगों की तुलना में 17% ज्यादा होती है जो अंधेरे में सोते हैं।

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कैसे कर सकते हैं बचाव?

  • डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम 60 मिनट पहले सभी डिजिटल आइटम से खुद को दूर कर दें।
  • ब्लू लाइट फिल्टर: अगर काम करना जरूरी हो, तो डिवाइस में ‘नाइट मोड’ या ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग करें।
  • बेडरूम का नियम: अपने बेडरूम को सिर्फ सोने के लिए रखें, वहां टीवी या लैपटॉप का स्टैंड न बनाएं।
  • किताबें पढ़ें: फोन की जगह फिजिकल बुक पढ़ने की आदत डालें, इससे मेलाटोनिन बढ़ता है और गहरी नींद आती है।

चांद न दिखने पर क्या बढ़ जाता है रमजान का महीना?

इस्लामी कैलेंडर में एक महीना या तो 29 दिन का होता है या तो 30 दिन का। रमजान का महीना खत्म होने के लिए शव्वाल के महीने का चांद दिखना अनिवार्य है। यदि 29वें रमजान की शाम को चांद नहीं दिखता तो यह माना जाता है कि रमजान का महीना अभी पूरा नहीं हुआ है और अगला दिन यानी 30वां दिन भी उपवास मतलब रोजा रखा जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक गणनाओं को अनुसार, चांद दिखना भौगोलिक स्थिति और मौसम पर निर्भर करता है। जब आसमान साफ न हो या चांद छोटा हो तो वह दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में ‘इतमाल’ यानी महीना पूरा करना के नियम के तहत रमजान को 30 दिनों का कर दिया जाता है जिसके अगले दिन ईद मनाई जाती है।

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चांद न दिखने पर क्या होता है?

इस्लामी शरीयत के अनुसार, महीनों का निर्धारण ‘रुयत-ए-हिलाल’ यानी चांद देखने पर टिका है। यह नियम पैगंबर मोहम्मद साहब की सुन्नत पर आधारित है, जिसमें चांद देखकर रोजा रखने और चांद देखकर ही ईद मनाने का निर्देश दिया गया है।

29 या 30 दिन का गणित: खगोलीय गणना के अनुसार, चंद्रमा को पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 29.5 दिन लगते हैं। इसी कारण इस्लामी महीनों में कभी 29 दिन होते हैं तो कभी 30। अगर 29वीं तारीख की शाम को नया चांद आसमान पर नजर आ जाता है तो नया महीना शुरू हो जाता है। अगर बादलों या अन्य कारणों से चांद नहीं दिखता, तो वर्तमान महीने को 30 दिन का माना जाता है।

शरीयत का नियम: इस्लामी कानून (शरीयत) के मुताबिक, इबादत के लिए गवाही या प्रत्यक्ष दर्शन जरूरी है। यदि 29 रमजान को चांद नहीं दिखता, तो यह माना जाता है कि चांद अभी अपनी उस स्थिति में नहीं आया है जहां से वह दिखाई दे सके। इसलिए, रमजान के 30 रोजे पूरे करना अनिवार्य हो जाता है।

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दुनिया भर में अलग-अलग समय: चूंकि चांद दिखने का समय भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है इसलिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रमजान की शुरुआत और ईद की तारीख में एक दिन का अंतर अक्सर देखने को मिलता है।

ईद की तारीख में बदलाव: चांद न दिखने का सीधा मतलब है कि शव्वाल का महीना शुरू नहीं हुआ है। इसलिए ईद-उल-फितर अगले दिन के बजाय उसके बाद वाले दिन मनाई जाती है।

तरावीह की नमाज: यदि 29वें रोजे की शाम चांद नहीं दिखता, तो उस रात मस्जिदों में ‘तरावीह’ की विशेष नमाज पढ़ी जाती है, क्योंकि वह अभी भी रमजान का ही हिस्सा होता है।

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

26 मार्च को दुर्गा अष्टमी तो महानवमी तिथि कब?, कन्या पूजन मुहूर्त, विधि, मंत्र और महत्व

चैत्र नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है और अब नवरात्रि समापन की तरफ बढ़ रहे हैं. चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि दुर्गाअष्टमी का व्रत किया जाता है और उससे अगले दिन महानवमी तिथि का व्रत कर कन्या पूजन किया जाता है. चैत्र नवरात्रि के दौरान भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की आराधना करते हैं, व्रत रखते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि में की गई साधना, व्रत और पूजा से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है, कष्टों का निवारण होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि 2026 में महानवमी का व्रत कब किया जाएगा और दोनों दिन कन्या पूजन का मुहूर्त क्या रहेगा…

कब है चैत्र नवरात्रि की महानवमी तिथि?
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां दुर्गा की आठवीं शक्ति महागौरी और नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना कर रामनवमी का पर्व मनाया जाता है. चैत्र नवरात्रि 2026 में 26 मार्च को दुर्गा अष्टमी का व्रत किया जाएगा लेकिन इस बार रामनवमी तिथि को लेकर कुछ लोगों में कनफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. तो आपकी चिंता को दूर करते हुए बता दें कि इस बार नवरात्रि पूरे 9 दिन के होने वाले हैं. इस वजह से किसी भी तिथि में कोई हेर-फेर की स्थिति नहीं है. 26 मार्च को दुर्गा अष्टमी का व्रत किया जाएगा तो 27 मार्च को रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा.

दुर्गा अष्टमी कन्या पूजन 2026 – 26 मार्च दिन गुरुवार
राम नवमी कन्या पूजन 2026 – 27 मार्च दिन शुक्रवार

क्या है कन्या पूजन का महत्व?
चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व है. कुछ लोग नवरात्रि की अष्टमी तिथि को कन्या पूजन करते हैं तो कुछ नवमी तिथि को. कन्या पूजन को कंजक पूजन भी कहा जाता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, छोटी कन्याएं देवी शक्ति का प्रतीक होती हैं. नवरात्रि के दौरान उनका पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. कन्या पूजन को शक्ति की आराधना का सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है.

क्यों किया जाता है अष्टमी-नवमी पर पूजन?
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष रूप से सिद्धि और शक्ति प्राप्ति का दिन माना जाता है. इन दिनों कन्याओं में देवी के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री का वास माना जाता है. इसलिए इन दिनों कन्या पूजन करने का विशेष फल मिलता है. धार्मिक मान्यता के अनुसारा, अष्टमी व नवमी तिथि को कन्याओं को भोजन कराने और उनका आशीर्वाद लेने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

दुर्गा अष्टमी कन्या पूजन मुहूर्त 2026
सुबह 6 बजकर 12 मिनट से 7 बजकर 51 मिनट तक
सुबह 10 बजकर 56 मिनट से 3 बजकर 32 मिनट तक
रामनवमी कन्या पूजन मुहूर्त 2026
सर्वार्थ सिद्धि योग – 6 बजकर 17 मिनट से 3 बजकर 24 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त – 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक
रवि योग – पूरे दिन

कन्या पूजन मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः।
या देवी सर्वभू‍तेषु कन्या पेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
ॐ श्री दुं दुर्गायै नमः ।।

कन्या पूजन की विधि
कन्या पूजन के लिए सुबह स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को पवित्र करें. इसके बाद 9 या 7 छोटी कन्याओं (और एक बालक, जिसे लांगूर कहा जाता है) को घर आमंत्रित करें. सबसे पहले कन्याओं के पैर धोकर उन्हें स्वच्छ आसन पर बैठाएं. फिर उनके माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं और चुनरी या दुपट्टा भेंट करें. इसके बाद उन्हें पूड़ी, सब्जी, काला चना, हलवा आदि का प्रसाद श्रद्धा पूर्वक खिलाएं. भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा, उपहार और प्रसाद देकर उनका आशीर्वाद लें. अंत में मां दुर्गा की आरती कर पूजा का समापन करें.

मीडिया कंपनियों को ट्रंप की धमकी, ईरान को लेकर फेक न्यूज वाली कही बात

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के दौरान ईरान ने अमेरिका और इजरायल को अपने हमलों का दायरा और बड़ा करने की धमकी दी। ईरान ने अरब खाड़ी देशों ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे इस युद्ध के फिलहाल बंद होने की कम संभावना है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अमेरिका और इजरायल के साथ संबंधों को लेकर बात की। दरअसल, इधर खबर फैली कि अमेरिका के रिश्ते इजरायल के साथ खराब हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इजरायल के साथ खराब रिश्ते की खबर यह एक और फेक न्यूज है। ट्रंप ने पूछने के लहजे में कहा कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मेरी कोई बहस हुई है? उन्होंने कहा, ‘नहीं, हम सच में अच्छे से मिलते हैं और वह आपको बताएंगे कि हम पूरे युद्ध को लीड कर रहे हैं। मैं कहूंगा कि नेतन्याहू के साथ मेरा रिश्ता बहुत अच्छा है।’

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फेक न्यूज फैला रहा ईरान- ट्रंप

वहीं, ईरान द्वारा सीजफायर की मांग के उनके दावे को खारिज करने की खबरों पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘वे जनता को नहीं बताएंगे। मैंने बस उनकी गलत जानकारी के बारे में सच सामने रखा है। ईरान ने कहा कि उन्होंने यूएसएस अब्राहम लिंकन पर हमला किया। लिंकन पर कभी हमला नहीं हुआ।’

मीडिया कंपनियों को ट्रंप की धमकी

उन्होंने आगे कहा, ‘शुरू करने से पहले मुझे इसका एहसास नहीं था, लेकिन ईरान बहुत सारी फेक न्यूज के लिए जाना जाता है। वे हमारी फेक न्यूज से निपटते हैं और मुझे सच में लगता है कि यह बहुत आपराधिक किस्म की चीज है क्योंकि हमारी मीडिया कंपनियां, जिनकी कोई साख नहीं है, ऐसी जानकारी दे रही हैं जिसके बारे में उन्हें पता है कि वह झूठी है। यह देश के लिए बहुत खतरनाक बात है। मुझे लगता है कि वे गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं।’

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युद्ध में फेक न्यूज का सहारा

बता दें कि इस समय ईरान, इजरायल और अमेरिका फेक न्यूज का सहारा ले रहे हैं। पिछले दिनों खबर आई कि बेंजामिन नेतन्याहू हमले में मारे गए हैं लेकिन रविवार को नेतन्याहू ने अपने सोशल मीडिया पर अपनी एक कॉफी पीते हुए वीडियो डाली। यह फेक खबर ईरान ने फैलाई थी। इसी तरह से अमेरिका भी ईरान को लेकर कई भ्रामक दावे कर रहा है।

इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को यह कहते हुए ईरान पर हमला किया था कि वे ईरान के परमाणु व सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं और ईरान के लोगों से भी अपने नेताओं के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और फारस की खाड़ी के आसपास के पड़ोसी देशों पर हमले किए। इस संघर्ष के कारण वैश्विक विमानन सेवाएं अस्त-व्यस्त हो गई हैं, तेल निर्यात बाधित हुआ है और दुनियाभर में ईंधन की कीमतों में बढोतरी हुई है।

ईरान-यूएस तनाव के बीच, ट्रंप ने पीएम मोदी से होर्मुज प्रासंगिक मुद्दों पर की चर्चा

नई दिल्ली : ईरान युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा की.अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी प्रधानमंत्री मोदी से बात की. उन्होंने मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने का महत्व भी शामिल है.”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद कहा कि भारत पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द तनाव कम करने और शांति बहाल करने का समर्थन करता है. इस बातचीत में वैश्विक पोत परिवहन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया.
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के वास्ते ईरान के लिए अमेरिका की ओर से समयसीमा पांच दिन बढ़ाए जाने के एक दिन बाद ट्रंप ने मोदी को फोन किया.मोदी ने कहा, “भारत तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है. होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला, सुरक्षित और सुलभ रहना पूरी दुनिया के लिए आवश्यक है. हमने शांति और स्थिरता के प्रयासों के संबंध में संपर्क में रहने पर सहमति व्यक्त की.”

इस संबंध में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण पोत परिवहन मार्ग को खुला रखने के महत्व पर विचार-विमर्श किया. गोर ने सोशल मीडिया पर कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की अभी बातचीत हुई. उन्होंने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने का महत्व भी शामिल है.”

आपको बता दें कि दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ट्रंप के उस बयान के 24 घंटे से भी कम समय बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ईरान ने मध्य पूर्व में चल रही शत्रुता पर सार्थक बातचीत की है और होर्मुज को फिर से खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम देने के बाद ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमले को पांच दिनों के लिए टाल दिया है.इससे पहले दिन में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में बयान दिया था. उन्होंने कहा कि युद्ध के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीति के माध्यम से भारत लगातार प्रयास कर रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार सभी उपलब्ध स्रोतों से गैस और कच्चे तेल की खरीद के लिए प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि भारत 40 से अधिक देशों के साथ ऊर्जा आयात कर रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी ये प्रयास जारी रहेंगे क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध ने वैश्विक स्तर पर गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है.

उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य युद्ध को कम करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना है, और देश सभी पक्षों को शांतिपूर्ण तरीके से सभी मुद्दों को हल करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहा हैय

पीएम मोदी ने कहा, “भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से पश्चिम एशिया में शांति चाहता है. हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के संपर्क में हैं. हमारा उद्देश्य क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए संवाद और कूटनीति है. हमने उनसे युद्ध को कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के बारे में बात की है.”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में छिड़े वर्तमान संघर्ष के कारण उत्पन्न स्थिति से निबटने के लिए अधिकार संपन्न सात नये समूहों का गठन किया गया है जो एलपीजी, आवश्यक सेवाओं एवं वस्तुओं की आपूर्ति एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अन्य विषयों का नियमित आकलन कर सुझाव देंगे.

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर राज्यसभा में अपनी ओर से वक्तव्य देते हुए कहा कि तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है तथा इस युद्ध ने विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है.

उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है. उनके अनुसार इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं और इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है.

जीते हुए MLA भी BJP का देते साथ! विपक्ष की कितनी बड़ी है ये परेशानी?

इस बार के राज्यसभा चुनाव भी विपक्ष के लिए टेंशन और बगावत साथ लेकर आया है। सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में जमकर विपक्षी विधायकों ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए समर्थित उम्मीदवारों के लिए अपनी ही पार्टी ने दगाबाजी कर दी। इस बार बगावत से त्रस्त होने वाली पार्टियों में हमेशा की तरह कांग्रेस रही। इसके अलावा बिहार की राष्ट्रीय जनता दल और ओडिशा की बीजू जनता दल हैं। दरअसल, देश के संसद के उच्च सदन राज्यसभा में 37 सीटें खाली हुई थीं। इसमें से विभिन्न राज्यों में पहले ही 26 उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए थे। बची हुई 11 सीटों के लिए बिहार, ओडिशा और हरियाणा में चुनाव हुए।

बीजेपी इन 11 सीटों में से 9 सीटें जीत गई, जबकि विपक्ष दो ही सीट जीत सका। इसमें खास बात यह है कि बीजेपी के पास 8 सीटें जीतने का संख्या बल था और विपक्ष के पास 3 सीटें लेकिन बीजेपी ने अपने समीकरण से विपक्ष के विधायकों को तोड़ लिया और उसने बिहार की एक राज्यसभा सीट अपने नाम कर ली। विपक्ष में हुई इस बगावत ने कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी तीनों को ही चिंता में डाल दिया है।

सवाल उठ रहे हैं कि एक तो विपक्षी दल राज्यों में चुनाव हार रहे हैं, उनकी सरकारें लंबे समय से नहीं बन रहीं। जैसे-तैसे करके उसके विधायक जीतते हैं और पार्टी विपक्ष में आती है, मगर चुनाव बाद जब राज्यसभा चुनाव होते हैं तो उनके विधायक अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी को समर्थन दे देते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि विपक्ष के लिए यह कितनी बड़ी परेशानी है…

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बिहार में दलबदल सबसे तेज

राज्यसभा चुनाव में वासे तो बिहार, ओडिशा और हरियाणा में हुआ। मगर, सबसे अधिक नाटकीय घटनाक्रम बिहार में देखने को मिला। बिहार से खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा चुनाव लड़कर निर्विरोध चुने गए। इसके अलावा एनडीए की ओर से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर जद(यू), बीजेपी के शिवेश कुमार और RLM के उपेंद्र कुशवाहा ने पर्चे भरे थे। इसमें से रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को जीताने भर का संख्याबल एनडीए के पास था, लेकिन शिवेश कुमार जीतते हुए नहीं दिख रहे थे।

वोटों का समीकरण कैसे हुआ?

शिवेश कुमार के सामने आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने अमरेंद्र धारी सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। अमरेंद्र धारी सिंह को जीताने के लिए महागठबंधन के पास 35 सीटें ही थीं, आरजेडी ने अतिरिक्त 6 सीटें एआईएमआईएम (5) और बसपा (1) से बात करके अपने पक्ष में कल ली थीं। महागठबंधन मानकर चल रहा था कि उनके उम्मीदवार की जीत होगी, लेकिन वोटिंग खत्म होने तक कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक वोट देने नहीं पहुंचे, जिसका सीधा फायदा एनडीए को हुआ और शिवेश कुमार जीत गए।

जीत के बाद विपक्ष ने बीजेपी के ऊपर विधायकों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। इस तरह से बिहार में एनडीए ने चुनाव में बिहार की पांचों सीटों पर जीत हासिल करते हुए क्लीन स्वीप किया और विपक्ष का सफाया हो गया।

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विपक्षी खेमें में चिंता

पिछले साल ही हुए विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल आरजेडी के पास 25, कांग्रेस की 6, वामदलों की 3, और आईआईपी के पास एक सीट आई थी। बीजेपी-जेडीयू के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए कुल 240 सीटों में से 202 सीटें जीत लीं। इसमें 89 बीजेपी, 85 जेडीयू, एलजेपीआर 19, हम 5 और आरएलएम ने 3 सीटें जीतीं। लंबे अरसे से बिहार में सरकार बनाने की आस देख रही आरजेडी के हाथ निराशा लगी। मगर, चुनाव के महज चार महीने बाद ही विपक्ष को राज्यसभा चुनाव में एक और झटका लग गया। यह घटनाक्रम विपक्षी खेमें में चिंता पैदा किए हुए है।

ओडिशा में भी बीजेपी का दबदबा

इसी तरह से नाटकीय घटनाक्रम ओडिशा में भी देखने को मिला। ओडिशा की 147 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेडी और कांग्रेस के पास अपने संयुक्त उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को जिताने के लिए पर्याप्त संख्याबल था। मगर, बीजेपी के 8 विधायकों (2 निलंबित शामिल हैं) और कांग्रेस के तीन विधायकों ने अपनी पार्टी ने बगावत करके बीजेपी समर्थित पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे के लिए क्रॉस वोटिंग की।

यहां की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल और कांग्रेस के कुछ विधायकों की क्रॉस-वोटिंग करने के बाद कड़े मुकाबले में बीजेपी ने राज्यसभा की दो सीटें जीत लीं। ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव हुए, इसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता और ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार राज्यसभा चुनाव जीतने में सफल रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की।

वहीं, बीजेडी से संतृप्त मिश्रा ने जीत हासिल की। कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगा और उसके तीन विधायकों ने पार्टी ने बगावत की।

हरियाणा में दोनों ने जीती एक-एक सीट

ऐसे ही हरियाणा की दो राज्य सभा सीटों के लिए सोमवार को मतदान हुआ। एक सीट जीतते हुए भी बीजेपी ने दो उम्मीदवार दिए थे। बीजेपी द्वारा दूसरा उम्मीदवार देने की वजह से कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर था, जिससे मुकाबला रोमांचक हो गया। हालांकि पहले ही बीजेपी प्रत्याशी संजय भाटिया की जीत सुनिश्चित मानी जा रही थी, लेकिन कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर था।

कांग्रेस को जैसा डर था वैसा हुआ भी और पार्टी के पांच विधायकों ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। मगर, पार्टी नेता भूपेंद्र हुड्डा पार्टी उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध को जीत दिलाने में कामयाब रहे। बीजेपी से संजय भाटिया जीत हुई।

इस राज्यसभा चुनाव के बाद चर्चा होने लगी है कि एक तो बड़ी मुश्किल से विपक्षी दलों को राज्यों में जीत मिल रही है लेकिन, जीते हुए विधायक भी वक्त पर काम ना आकर बीजेपी को वोट दे देते हैं। अगर, इस पैटर्न पर विपक्ष रोक नहीं लगा पाया तो उसके लिए भविष्य में भी परेशानी खड़ी हो सकती है।

ट्रंप का दावा: ईरान ने परमाणु हथियार न रखने पर किया समझौता, अमेरिका ने युद्ध में जीत दर्ज की

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने पर पूरी तरह सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया गया है

उन्होंने तीन सप्ताह से चल रहे ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका की जीत की घोषणा भी की और उन्होंने कहा कि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तेल-गैस संबंधी एक बहुत बड़ा तोहफा अमेरिका को भेजा है।

मंगलवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौता करने के लिए उत्सुक है और संकेत दिया कि उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, मध्य पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान ईरानी नेतृत्व में पहले ही महत्वपूर्ण बदलाव हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में, यह सत्ता परिवर्तन है। आप जानते हैं, यह सत्ता में बदलाव है क्योंकि सभी नेता उन नेताओं से बहुत अलग हैं जिन्होंने शुरुआत में ये सारी समस्याएं पैदा की थीं।
इससे पहले, ट्रंप ने ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता को सुविधाजनक बनाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया पोस्ट का समर्थन किया। शरीफ ने चल रहे संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए वार्ता की मेजबानी करने की भी पेशकश की।
मार्कवेन मुलिन के गृह सुरक्षा विभाग के नए सचिव के रूप में शपथ ग्रहण समारोह के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा मैं पहले से कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन वे इस बात पर सहमत हो गए हैं कि उनके पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे।

ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल आपूर्ति से संबंधित एक “महत्वपूर्ण पुरस्कार” दिया है। वे एक समझौता करने जा रहे हैं। उन्होंने कल कुछ ऐसा किया जो वास्तव में अद्भुत था। उन्होंने हमें एक उपहार दिया। और वह उपहार आज पहुंचा। यह एक बहुत बड़ा उपहार था जिसकी कीमत बहुत अधिक थी।

आगे ट्रंप ने कहा कि मैं आपको यह नहीं बताऊंगा कि वह उपहार क्या है, लेकिन यह एक बहुत महत्वपूर्ण पुरस्कार था। और उन्होंने इसे हमें दिया है। तो इसका मेरे लिए एक ही मतलब है, हम सही लोगों से निपट रहे हैं। नहीं, यह परमाणु हथियार नहीं थे। यह तेल और गैस से संबंधित था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया गया है।

ट्रंप ने कहा कहा कि मुझे यह कहना अच्छा नहीं लगता। हमने यह युद्ध जीत लिया है। यह जंग हम जीत चुके हैं… यह ऐसा है जैसे हम कोई युद्ध नहीं जीत रहे जहां उनके पास न नौसेना है, न वायु सेना है, न कुछ भी नहीं है। और हमारे विमान तेहरान और उनके देश के अन्य हिस्सों के ऊपर से उड़ रहे हैं। वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।

सिर मुंडवाने से रूसी खत्म हो जाती है या नहीं? सच्चाई जान लीजिए

अक्सर जब लोग डैंड्रफ यानी रूसी की समस्या से बहुत परेशान हो जाते हैं, तो उन्हें लगता है कि सिर मुंडवाना या ‘गंजा’ होना ही इसका आखिरी इलाज है। लोगों के मन में यह धारणा बैठी हुई है कि अगर सिर पर बाल ही नहीं रहेंगे, तो रूसी कहां टिकेगी लेकिन हाल ही में ‘इंडियन एक्प्रेस’ की एक रिपोर्ट में डॉ.श्वेता नखावा (KIMS अस्पताल, ठाणे की डर्मेटोलॉजिस्ट) ने इस बात को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिर मुंडवाने से रूसी का इलाज नहीं होता, बल्कि यह सिर्फ एक अस्थायी भ्रम है।

डॉ.श्वेता नखावा के अनुसार, डैंड्रफ का असली कारण हमारे बाल नहीं बल्कि सिर की त्वचा यानी ‘स्कैल्प’ होती है। जब कोई व्यक्ति अपना सिर मुंडवाता है, तो रूसी के सफेद टुकड़े सिर्फ इसलिए कम दिखाई देते हैं क्योंकि अब उन्हें धोना या साफ करना आसान हो गया है।

डैंड्रफ तब होता है जब हमारी स्कैल्प पर मौजूद तेल और एक विशेष प्रकार की फंगस आपस में मिल जाते हैं। सिर मुंडवाने से न तो तेल बनाने वाली जड़ कम होती हैं और न ही उस फंगस का बढ़ना रुकता है, इसीलिए जैसे ही बाल वापस आते हैं डैंड्रफ फिर से दिखने लगता है।

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क्या सिर मुंडवाना स्कैल्प के लिए खतरनाक हो सकता है?

डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि सिर मुंडवाने से स्थिति और भी खराब हो सकती है। जब किसी रेजर का इस्तेमाल करते हैं, तो सिर की त्वचा पर छोटे-छोटे कट लग सकते हैं। इससे स्कैल्प की वह प्राकृतिक परत कमजोर हो जाती है जो उसे बाहरी संक्रमण से बचाती है। बाल न होने की वजह से सिर पर सीधे तौर पर तेज धूप, धूल और प्रदूषण के संपर्क में आ जाती है। इसकी वजह से सिर में रूखापन, खुजली और लाल होने जैसी समस्याएं बढ़ सकती है, जो डैंड्रफ के लिए जिम्मेदार कीटाणुओं को पनपने का और ज्यादा मौका देती हैं।

रूसी से छुटकारा पाने का सही और वैज्ञानिक तरीका

डॉ. नखावा ने सलाह दी है कि इस समस्या से लड़ने के लिए किसी भी बड़े कदम (जैसे मुंडन) की बजाय लगातार देखभाल करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने बताया कि ‘मेडिकेटेड एंटी-डैंड्रफ शैम्पू’ का नियमित इस्तेमाल ही इसका सबसे कारगर इलाज है। इन शैम्पू को इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें लगाकर तुरंत न धोएं, बल्कि कुछ मिनटों के लिए सिर पर छोड़ दें ताकि वे फंगस को खत्म कर सकें।

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इसके अलावा, डॉक्टर ने बहुत ज्यादा तेज साबुन के इस्तेमाल से बचने, सिर को सीधी धूप से बचाने और मानसिक तनाव को कम रखने की सलाह दी है। अंत में उन्होंने यही जोर दिया कि डैंड्रफ एक त्वचा की स्थिति है, इसलिए इलाज त्वचा का होना चाहिए, बालों का नहीं।

नवरात्रि में किया गया ये छोटा सा उपाय साढ़े साती के बड़े से बड़े संकट को कर देगा खत्म!

हर साल नवरात्रि आते ही घर-घर में पूजा, व्रत और भक्ति का माहौल बन जाता है, लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ मां दुर्गा की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि शनि की साढ़े साती से राहत पाने के उपाय भी तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं. जिन लोगों के जीवन में लगातार रुकावटें, आर्थिक तनाव या मानसिक दबाव बना हुआ है, वे इसे अक्सर शनि के प्रभाव से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में नवरात्रि जैसे पावन दिनों में किए गए उपाय शनि की साढ़े साती के असर को कम कर सकते हैं? ज्योतिष के जानकारों की मानें तो नवरात्रि का समय आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है, और इसी वजह से इस दौरान किए गए उपाय ज्यादा असरदार माने जाते हैं. यही कारण है कि इन दिनों मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-पाठ का सिलसिला बढ़ जाता है.

नवरात्रि और साढ़े साती का कनेक्शन क्या है?
ज्योतिष मान्यता के अनुसार, शनि की साढ़े साती करीब साढ़े सात साल तक चलने वाली एक ऐसी अवधि होती है, जब व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अधिक तीव्र रूप में मिलता है. यह तीन चरणों में बंटी होती है और हर चरण का असर अलग-अलग तरह से महसूस होता है. कई लोग बताते हैं कि इस दौरान करियर में रुकावट, रिश्तों में तनाव या स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाती हैं. हालांकि, इसे पूरी तरह नकारात्मक मान लेना भी सही नहीं है. कई मामलों में यही समय लोगों को मजबूत और अनुशासित भी बनाता है. नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ अगर शनि से जुड़े उपाय किए जाएं, तो इसे संतुलन बनाने वाला समय माना जाता है.

क्यों खास मानी जाती है नवरात्रि?
आध्यात्मिक ऊर्जा का समय
नवरात्रि के नौ दिन को ऊर्जा का सबसे शुद्ध और सक्रिय समय माना जाता है. इन दिनों में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और साधना का असर सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा माना जाता है.

दुर्गा सप्तशती का महत्व
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ एक आम परंपरा है. मान्यता है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और मानसिक स्थिरता मिलती है. कुछ ज्योतिषाचार्य यह भी बताते हैं कि साढ़े साती के हर साल के लिए 100 श्लोकों का पाठ प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा जाता है, जिससे व्यक्ति को राहत मिल सकती है.

नवरात्रि में किए जाने वाले खास उपाय
1. शनि मंत्र का जाप
नवरात्रि के दौरान रोजाना “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना काफी फायदेमंद माना जाता है. कई लोग सुबह या शाम मंदिर जाकर यह जाप करते हैं, जिससे मन को शांति भी मिलती है.
2. तेल का दीपक और दान
शनिवार या नवरात्रि के खास दिनों में शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना आम बात है. इसके साथ ही काले तिल, लोहे की वस्तु या काले कपड़े का दान करने की भी सलाह दी जाती है.

3. हनुमान पूजा का असर
दिलचस्प बात यह है कि शनि के प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी की पूजा भी काफी लोकप्रिय है. नवरात्रि में हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ जाती है. एक स्थानीय श्रद्धालु बताते हैं कि उन्होंने लगातार नौ दिन तक हनुमान चालीसा पढ़ी और उन्हें मानसिक राहत महसूस हुई. हालांकि, इसे आस्था से जोड़कर ही देखा जाता है.
4. शमी पौधे का महत्व
कई लोग नवरात्रि के दौरान शमी के पौधे में काले तिल अर्पित करते हैं. मान्यता है कि इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं.

क्या कहते हैं जानकार?
ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी उपाय तभी असर करता है जब उसे सही समय और सही तरीके से किया जाए. नवरात्रि जैसे विशेष अवसर पर किए गए उपाय इसलिए ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं क्योंकि उस समय व्यक्ति की आस्था और ध्यान दोनों मजबूत होते हैं. हालांकि, वे यह भी साफ करते हैं कि साढ़े साती को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन इसके प्रभाव को जरूर कम किया जा सकता है.

आस्था और अनुभव का मेल
आज के समय में जहां लोग एक ओर विज्ञान और लॉजिक पर भरोसा करते हैं, वहीं दूसरी ओर कठिन समय में आस्था का सहारा लेना भी आम बात है. नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले ये उपाय सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लोगों के लिए एक मानसिक सहारा भी बन जाते हैं. कई बार यही विश्वास व्यक्ति को मुश्किल दौर से निकलने की ताकत देता है.

चंद्रमा और मूलांक 2 का सुंदर संयोग, जानें आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा शुक्रवार

भावनाओं और समझदारी के मेल को 20 फरवरी के दिन के तौर पर देखा जा रहा है। शुक्रवार का स्वामी शुक्र है और आज का मूलांक 2 है। इनका स्वामी चंद्रमा है। यह संयोग रिश्तों में सुधार करने और अटके हुए कामों को शांति से निपटाने के लिए बहुत अच्छा माना जा रहा है। अगर किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं या किसी पुराने विवाद को सुलझाना चाहते हैं तो सितारों की चाल आपके पक्ष में है।

मीन राशि में चंद्रमा का गोचर होने के कारण लोगों में करुणा और दूसरों की मदद करने की भावना बढ़ेगी। यह समय केवल भागदौड़ का नहीं बल्कि थोड़ा रुककर अपने मन की सुनने और अपनी रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा देने का है। आइए जानते हैं कि इस खास खगोलीय स्थिति का आपकी राशि पर क्या असर पड़ेगा।

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कैसा रहेगा राशि का हाल?

मेष राशि

आज का दिन आपके लिए बहुत अच्छा है। टीम वर्क और नई प्लानिंग से बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है।

क्या करें: अनुभवी लोगों की राय सुनें। अपनी सेहत का ख्याल रखें।

क्या न करें: किसी भी तरह की बहसबाजी और जल्दबाजी में पैसा लगाने से बचें।

वृषभ राशि

करियर के लिहाज से यह दिन काफी स्थिर रहेगा। परिवार में हंसी-खुशी का माहौल बनेगा और तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे।

क्या करें: अधूरे कामों को प्राथमिकता दें। थोड़ा दान-पुण्य करें।

क्या न करें: बिना सोचे-समझे पैसे खर्च न करें। अपने गुस्से पर काबू रखें।

मिथुन राशि

आज आपकी बातों का जादू चलेगा। नए लोगों से जुड़ना और छोटी यात्राएं करना आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है।

क्या करें: कुछ नया सीखने की कोशिश करें। पुराने दोस्तों से फिर से संपर्क साधें।

क्या न करें: सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा न करें। किसी से किया वादा न तोड़ें।

कर्क राशि

आज मन खुश रहेगा और घर में सुख-शांति बनी रहेगी। आपकी आर्थिक स्थिति में पहले से सुधार देखने को मिलेगा।

क्या करें: घर के कामों को निपटाएं। माता-पिता का आशीर्वाद लें।

क्या न करें: बहुत ज्यादा इमोशनल होकर कोई फैसला न लें और हेल्थ को लेकर कोई लापरवाही न बरतें।

सिंह राशि

आज आप अपनी काबिलियत से सबको प्रभावित करेंगे। दफ्तर में सम्मान या कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं।

क्या करें: आत्मविश्वास बनाए रखें। शारीरिक कसरत पर ध्यान दें।

क्या न करें: अपने भीतर घमंड न आने दें। दूसरों का सम्मान करें।

कन्या राशि

आज आपकी बुद्धिमानी आपको हर मुश्किल से बाहर निकाल लेगी। हेल्थ अच्छा रहेगा। साथ ही दिनभर छोटी-छोटी सफलताएं मिलती रहेंगी।

क्या करें: बारीकियों पर ध्यान दें। मन की शांति के लिए योग करें।

क्या न करें: हर काम में कमी निकालने की आदत से बचें। दूसरों की बुराई न करें।

तुला राशि

रिश्तों के मामले में आज का दिन आपके लिए शानदार है। पार्टनर के साथ तालमेल बढ़ेगा। निवेश के कुछ अच्छे अवसर मिल सकते हैं।

क्या करें: आर्ट या म्यूजिक का आनंद लें और अपनों के साथ वक्त बिताएं।

क्या न करें: निर्णय लेने में देरी न करें। सच का साथ दें।

वृश्चिक राशि

आज आपको कोई छिपा हुआ लाभ मिल सकता है। अध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा और जटिल काम आसानी से पूरे हो जाएंगे।

क्या करें: गहरी रिसर्च या खोजबीन वाले काम करें और ध्यान लगाएं।

क्या न करें: पुरानी कड़वी बातों को न दोहराएं और किसी से जलन न करें।

धनु राशि

पूरा दिन जोश और ऊर्जा से भरा रहेगा। अगर किसी लंबे सफर पर जाने की सोच रहे हैं तो आज का दिन सफलता दिलाने वाला है।

क्या करें: अपनी नॉलेज बढ़ाएं और प्रकृति के करीब समय बिताएं।

क्या न करें: जोश में आकर नियम न तोड़ें और बहस से दूर रहें।

मकर राशि

आपकी मेहनत का मीठा फल मिलने का समय आ गया है। करियर में मजबूती आएगी और आर्थिक पक्ष भी बेहतर होगा।

क्या करें: भविष्य की ठोस प्लानिंग करें और अपनी मेहनत जारी रखें।

क्या न करें: खुद को अकेला न समझें और बिना सोचे-समझे जोखिम न लें।

कुंभ राशि

आज आपको कुछ अचानक मिलने वाली खुशियां मिल सकती हैं। नए लोगों से दोस्ती भविष्य में आपके बड़े काम आएगी।

क्या करें: सोशल नेटवर्किंग बढ़ाएं और नई तकनीक का इस्तेमाल करें।

क्या न करें: मन को भटकने न दें और अपनी व्यक्तिगत बातें गुप्त रखें।

मीन राशि

आज आप सितारों के राजा हैं! चंद्रमा आपकी ही राशि में है, जिससे आपका आत्मविश्वास और भाग्य दोनों सातवें आसमान पर रहेंगे।

क्या करें: अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करें और आराम भी करें।

क्या न करें: जरूरत से ज्यादा भावुक होने से बचें और बड़े फैसलों को कल पर टाल दें।

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।