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‘कांशीराम को मिले भारत रत्न’, राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच विपक्षी नेता राहुल गांधी ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग की। कांशीराम की जयंती के अवसर पर की गई इस मांग को यूपी की राजनीति में दलित वोटबैंक को साधने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी कांशीराम को सामाजिक न्याय का योद्धा बताते हुए कहा कि उन्हें सम्मानित करना उस पूरे आंदोलन का सम्मान होगा, जिसने करोड़ों लोगों को हक और हिस्सेदारी की राह दिखाई। उन्होंने तर्क दिया कि कांशीराम ने न केवल बहुजन समाज में चेतना पैदा की, बल्कि भारतीय राजनीति के स्वरूप को ही बदल दिया। लखनऊ में हाल ही में आयोजित संविधान सम्मेलन के बाद राहुल का यह कदम कांग्रेस की दलितों तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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आपको बता दें कि BSP संस्थापक द्वारा तैयार किया गया कैडर आधारित आंदोलन फिलहाल नेतृत्व और जनाधार के संकट से जूझ रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने के बाद BSP का गैर-जाटव दलित वोटबैंक सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर झुका है। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा कांशीराम को सम्मान दिलाने की पैरवी करना BSP के बचे-खुचे आधार में सेंध लगाने की एक सोची-समझी रणनीति है। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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20% दलित वोटरों पर सबकी नजर

उत्तर प्रदेश की सियासत में करीब 20 प्रतिशत दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कांशीराम की विरासत पर अधिकार जताने की यह होड़ इसलिए भी तेज है क्योंकि कभी इस वोटबैंक पर एकछत्र राज करने वाली BSP का ग्राफ लगातार गिर रहा है।

राहुल गांधी की यह मांग सीधे तौर पर उन मतदाताओं को संदेश है जो मायावती के विकल्प की तलाश में हैं। यूपी के जिलों में इन दिनों कांशीराम के पोस्टर विपक्षी दलों के झंडों के साथ दिखना इस बात का प्रमाण है कि 2027 की बिसात बिछ चुकी है।

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