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मां का दूध ही नवजात की पहली सुरक्षा कवच, जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने का दिया संदेश

IMG-20260806-WA0387कौशाम्बी। जिले में स्वस्थ और कुपोषण मुक्त समाज की नींव मजबूत करने के उद्देश्य से विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत गुरुवार को स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कौशाम्बी के मदर एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) विंग में व्यापक स्तनपान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाल रोग विभाग, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा सामुदायिक चिकित्सा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्तनपान के महत्व, सही तकनीक और इससे जुड़ी भ्रांतियों के प्रति जागरूक किया गया।
 
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) हरिओम कुमार सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए प्रकृति का सबसे अमूल्य उपहार है। जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और जीवन के पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना प्रत्येक नवजात का अधिकार है। इससे शिशु का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास बेहतर होता है, वहीं दो वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने से बच्चे का संपूर्ण विकास सुनिश्चित होता है।
 
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकेश दुबे, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाखा दीक्षित तथा सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. सन्तोष कुमार ने कहा कि मां का दूध नवजात को संपूर्ण पोषण देने के साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। इससे निमोनिया, डायरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। उन्होंने बताया कि स्तनपान केवल बच्चे के लिए ही नहीं बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद शरीर जल्दी स्वस्थ होता है तथा स्तन और ओवरी के कैंसर का खतरा भी कम होता है।
 
विशेषज्ञों ने माताओं को स्तनपान की सही विधि का व्यवहारिक प्रदर्शन कराते हुए सामान्य भ्रांतियों का वैज्ञानिक आधार पर निराकरण किया। कार्यक्रम में उपस्थित गर्भवती एवं धात्री महिलाओं ने भी खुलकर अपने प्रश्न पूछे, जिनका चिकित्सकों ने विस्तार से समाधान किया। सभी माताओं से अपील की गई कि वे जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू करें और पहले छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही दें।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज कुमार तिवारी, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. निखिल चौधरी, डॉ. सोफिया, क्वालिटी मैनेजर डॉ. शुएब सिद्दीकी सहित अन्य चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी एवं महाविद्यालय के कर्मचारी मौजूद रहे।
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