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ना रोकने वाला ना टोकने वाला, गाजियाबाद स्टेशन की सुरक्षा में भारी लापरवाही

गाजियाबाद रेलवे स्टेशन (जंक्शन) दिल्ली एनसीआर के महत्वपूर्ण स्टेशनों में से एक है। यहां से रोजाना लगभग 250 से अधिक ट्रेनें आती-जाती हैं। गाजियाबाद से उत्तर, पूर्व, और पश्चिम भारत की कई लंबी दूरी की और स्थानीय यानी ईएमयू/पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं। यहां नई दिल्ली और आनंद विहार स्टेशनों से आने वाली ट्रेनें होकर आती-जाती हैं। ऐसे में यह बहुत व्यस्त स्टेशन हो जाता है। मगर, इतने व्यस्त स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था इतनी लचर है कि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति स्टेशन परिसर के अंदर आ-जा सकता है। यहां की सुरक्षा व्यवस्था बस नाम मात्र की है, जिनके जिम्मे स्टेशन की जिम्मेदारी है वह नदारद दिखे।

दरअसल, गाजियाबाद स्टेशन पूरी तरह से लापरवाही का घर बन चुका है। कोई भी आए और कोई भी जाए… कोई देखने, जांचने और पूछने वाला नहीं है। बैग में हथियार, नशा, वैध और अवैध क्या है? यह कोई नहीं देख रहा है। लोग धड़ल्ले से आते हैं और बिना जांच प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाते हैं। ट्रेन आती है और उस पर सवार होकर अपने गंतव्य की तरफ रवाना हो जाते हैं।

एग्जिट प्वाइंट से भी स्टेशन के अंदर

गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर अंदर जाने के लिए दो एंट्री प्लाइंट हैं। पहला सिटी साइट और दूसरा विजय नगर साइड है। रेलवे स्टेशन (सिटी साइड) से एंट्री प्वाइंट और एग्जिट प्वाइंट बराबर में हैं। यहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है, स्टेशन की सुरक्षा राम भरोसे चल रही है। एंट्री पर चेकिंग के नाम पर सिर्फ एक रेलवे सुरक्षा बल (RPF) जवान दिखाई दिया, जबकि इसके ठीक बराबर में मौजूद एग्जिट प्वाइंट से भी यात्री बगैर चेकिंग के स्टेशन परिसर के अंदर घुसते हुए दिखाई दिए। हम यहां 10 मिनट तक रहे, इसी दौरान तकरीबन 30 लोग स्टेशन परिसर के अंदर घुसते हुए दिखाई दिए।

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रोकने वाला कोई भी सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं

एग्जिट प्वाइंट से जब लोग स्टेशन परिसर के अंदर घुस रहे थे तब वहां उन्हें रोकने वाला कोई भी सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था। ऐसा ही नजारा विजय नगर साइड भी देखने को मिला। ऐसी व्यवस्था होने पर मादक पदार्थ की तस्करी करने वाले तस्कर से लेकर संदिग्ध व्यक्ति परिसर और ट्रेनों के अंदर आसानी से घुस सकते हैं। ऐसे में भविष्य में अप्रिय घटना हो सकती है।

प्लेटफॉर्म 6 से 1 तक एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं

गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्मों की संख्या कुल 6 है। ‘खबरगांव’ जब प्लेटफॉर्म एक से होते हुए प्लेटफॉर्म संख्या 6 पर पहुंचा तो इस दौरान पूरे फुटओवर ब्रिज पर एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं दिखाई दिया। जब हम प्लेटफॉर्म 3 और 4 से होते हुए आरपीएफ थाने पहुंचे तो इस दौरान भी दोनों प्लेटफॉर्म पर सुरक्षाकर्मी नदारद दिखे।

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गाजियाबाद रेलवे स्टेशन की हकीकत

दरअसल, गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर कुल स्वीकृत आरपीएफ जवानों की संख्या लगभग 115 है लेकिन यहां इनकी मौजूदा संख्या लगभग 60 है। स्टेशन का एरिया मेरठ साइड में चिपियाना बजुर्ग और आनंद विहार साइड में हिंडन नदी तक फैला हुआ है। गाजियाबाद जंक्शन दिल्ली, हावड़ा, मुरादाबाद और सहारनपुर की तरफ जाने वाली ट्रेनों को संभालने के लिए एक बड़ा रेल केंद्र है। इतने बड़े केंद्र के पास सुरक्षाकर्मियों की स्वीकृत संख्या से लगभग आधी संख्या है। यह कहीं ना कहीं मोदी सरकार और रेलवे मंत्रालय की कथनी और करनी में साफ अंतर दिखा रहा है।

इन परिस्थितियों में गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर अनहोनी होने पर जिम्मेदारी कौन लेगा?

मोदी सरकार और रेल मंत्रालय पर उठे सवाल

जब मोदी सरकार देश में बुलेट ट्रेन बना रही है और वंदे भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेनों का बेड़ा लगातार बढ़ा रही है तो ऐसे में सरकार रेल मंत्रालय को मूलभूत सुविधाएं क्यों नहीं दे पा रही? यह एक गंभीर सवाल पैदा करता है। इससे पहले खबरगांव ने दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन और आनंद विहार रेलवे स्टेशनों पर जाकर वहां की सुरक्षा व्यवस्था को देखा लेकिन वहां भी आरपीएफ की स्वीकृत संख्या से बहुत कम सुरक्षाकर्मी मौजूद हैं। सुरक्षाकर्मियों की कमी और इसकी पूर्ति नहीं होने से इन स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

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