केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित बाबा बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की संस्था को फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) के नियमों के तहत विदेश से फंडिंग लेने की मंजूरी दे दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बागेश्वर धाम जन सेवा समिति को FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन दे दिया है। गृह मंत्रायल से मिली इस मंजूरी के बाद अब यह संस्था आधिकारिक तौर पर विदेश से पैसा (दान) ले सकेगी।
बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री पिछले काफी समय से सुर्खियों में बने हुए थे। उनके प्रोग्राम्स में भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं और सोशल मीडिया की दुनिया में भी वह काफी मशूहर हैं। देश विदेश में उनके काफी समर्थक मौजूद हैं। धीरेंद्र शास्त्री भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग करते हैं और धार्मिक मामलों पर अक्सर अपनी राय रखते हैं। सामाजिक कार्यक्रमों के चलते भी वह सुर्खियों में रहे हैं लेकिन अब तक उनकी संस्था को विदेश से दान लेने की अनुमति नहीं थी।
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FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन जरूरी
भारत में विदेश से पैसा लेने के लिए सख्त कानून बने हुए हैं और अगर कोई गैर-सरकारी संगठन (NGO) या कोई संस्था विदेशी दान लेना चाहती है, तो उसके लिए FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद ही किसी भी काम के लिए विदेश से फंड लिया जा सकता है। इसके साथ ही संस्था को विदेशी फंड का पूरा हिसाब रखना होता है और गृह मंत्रालय फंडिंग पर पूरी नजर रखता है। कुछ नियमों के तहत ही यह मंजूरी मिलती है।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ‘श्री बागेश्वर जन सेवा समिति गढ़ा’ को चलाते हैं और उन्होंने इस समिती को सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक कैटैगरी के साथ-साथ धार्मिक कैटेगरी के तहत भी रजिस्टर किया है। 15 अप्रैल तक गृह मंत्रालय ने 38 NGO को FCRA रजिस्ट्रेशन दिया है।
क्या काम करती है संस्था?
श्री बागेश्वर जन सेवा समिति गढ़ा मध्य प्रदेश में स्थित है। यह समिति पंडित धीरेंद्र शास्त्री की देखरेख में काम करती है। मुख्य रूप से यह धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करवाती है। इसके अलावा सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्र में भी यह संस्था काम करती है। धीरेंद्र शास्त्री अपने बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। उनके धाम पर हर रोज भारी तादाद में लोग पहुंचते हैं।
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विदेशों से मिल सकेगा दान
विदेशों में भी उनके हजारों समर्थक हैं और इन दिनों वह ऑस्ट्रेलिया में हैं लेकिन अब तक उनकी संस्था विदेश से फंडिंग नहीं ले पाती थी। ऐसे में यह मंजूरी मिलना उनकी संस्था के लिए काफी अहम माना जा रहा है। अब विदेशी भक्त उनकी संस्था के खाते में सीधे दान की राशि डाल सकते हैं।












