श्रावस्ती के गिलौला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गंभीर अव्यवस्थाओं और गंदगी से जूझ रहा है। अस्पताल परिसर में झाड़-झंखाड़, कूड़े के ढेर और जलभराव की स्थिति है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी हो रही है। इन हालातों के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, गिलौला सीएचसी की बाउंड्री वॉल लगभग दस साल पहले टूट गई थी, जिसका अब तक पुनर्निर्माण नहीं कराया जा सका है। बाउंड्री वॉल न होने के कारण आवारा कुत्ते और मवेशी आसानी से अस्पताल परिसर में घुस आते हैं। इससे भर्ती मरीजों, लेबर रूम में प्रसूताओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा को लगातार खतरा बना रहता है। अस्पताल परिसर के कई हिस्सों में झाड़-झंखाड़ और गंदगी फैली हुई है। अस्पताल के पास स्थित तालाब में गंदा पानी भरा है, जिसमें जलकुंभी और अन्य जलीय पौधे उग आए हैं। इस तालाब से उठने वाली दुर्गंध आसपास के वातावरण को दूषित कर रही है, जिससे मच्छरों और अन्य कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ रहा है। यह स्थिति बीमारियों के फैलने की आशंका को और बढ़ा देती है। इसके अतिरिक्त, सीएचसी परिसर के पूर्व और उत्तर दिशा के कोनों पर भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा जमा है। स्थानीय निवासी भी अपने घरों का कचरा अस्पताल परिसर में डाल देते हैं, जिससे गंदगी लगातार बढ़ रही है। कई स्थानों पर गड्ढों में पानी भरने से जलभराव की स्थिति बनी रहती है, जहां झाड़-झंखाड़ उग आए हैं और आवारा कुत्ते व सूअर जैसे जानवर डेरा जमाए रहते हैं। स्थानीय निवासियों दुर्गेश, सुरेंद्र और अभिषेक ने बताया कि अस्पताल परिसर में साफ-सफाई और बाउंड्री वॉल के निर्माण को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल अस्पताल परिसर की साफ-सफाई कराने और टूटी हुई बाउंड्री वॉल का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि मरीजों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके। इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक दीपक शुक्ला ने बताया कि जल्द ही साफ-सफाई कार्य कराया जाएगा और बाउंड्री वॉल का निर्माण भी किया जाएगा।
गिलौला सीएचसी में गंदगी, बाउंड्री वॉल टूटी:मरीजों को परेशानी, संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा
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