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अब गीतों में समझ आएगा संविधान: छंदों में ढला भारत का कानून, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

लखनऊ । भारत का संविधान, जिसे अब तक कठिन भाषा और जटिल गद्य के रूप में जाना जाता था, अब काव्य और संगीत के जरिए आमजन तक पहुंचने जा रहा है। पहली बार देश के संपूर्ण संविधान को दोहा, रोला और विभिन्न छंदों में पिरोकर एक अनूठा साहित्यिक रूप दिया गया है।

इस विशेष कृति ‘छंदबद्ध भारत का संविधान’ को छंदबद्ध भारत का संविधान के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें संविधान के सभी अनुच्छेदों को 2110 दोहों और 422 रोलों में समाहित किया गया है। वहीं संविधान के 22 भागों को 22 अलग-अलग छंदगीतों में प्रस्तुत किया गया है।

भारत सहित नेपाल, इंडोनेशिया, सिंगापुर और कुवैत के कुल 142 रचनाकारों ने मिलकर इस महाग्रंथ का सृजन किया है। इसमें 14 वर्ष के युवा से लेकर 81 वर्ष तक के वरिष्ठ रचनाकार शामिल रहे, जिनमें 92 महिलाएं और 48 पुरुषों ने योगदान दिया।

इस अनोखी उपलब्धि को Golden Book of World Records में “फर्स्ट पोएट्री बुक ऑन कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया” के रूप में दर्ज किया गया है। इस ग्रंथ का संपादन डॉ. ओमकार साहू ‘मृदुल’, सह-संपादन डॉ. मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’ और डॉ. सपना दत्ता ‘सुहासिनी’ ने किया।

इस पुस्तक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि संविधान के मूल भाव को बिना बदले, उसे सरल, सहज और मधुर छंदों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, ताकि आमजन, विद्यार्थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी इसे आसानी से समझ और याद कर सकें।

इस महाग्रंथ की शुरुआत 26 नवंबर 2022 को हुई और 26 नवंबर 2023 को इसे पूर्ण किया गया। 26 नवंबर 1949 को संविधान अंगीकृत होने की ऐतिहासिक तिथि से प्रेरित होकर इसमें 26 छंदों का प्रयोग किया गया है। जिस तरह रामचरितमानस ने जटिल ग्रंथों को सरल बनाकर जन-जन तक पहुंचाया, उसी तरह ‘छंदबद्ध संविधान’ का उद्देश्य भी संविधान को हर व्यक्ति तक सहज रूप में पहुंचाना है।

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