पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले देश के लोगों से अपील की थी कि वे अगले एक साल तक देशहित में सोना ना खरीदें। इस अपील के बाद सोने को लेकर देशभर में चर्चा शुरू हो गई। इस बीच सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार अब देश के मंदिरों में रखे सोने को अपने नियंत्रण में लेने जा रही है और कि आयात बिल घटाने और गोल्ड के बढ़े हुए दाम को कंट्रोल करने के लिए सरकार मंदिरों में रखे सोने को मॉनेटाइज करने की योजना बना रही है लेकिन वित्त मंत्रालय ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
सोशल मीडिया पर इन दावों के वायरल होने के बाद अब वित्त मंत्रालय ने खुद सामने आकर पूरी सच्चाई बता दी है। सरकार ने साफ कहा है कि मंदिरों के सोने को लेकर जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। वित्त मंत्रालय ने साफ कहा है कि मंदिर ट्रस्टों या किसी भी धार्मिक संस्था के पास मौजूद सोने को लेकर कोई मोनेटाइजेशन योजना या गोल्ड बॉन्ड जारी करने की योजना नहीं है।
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सरकार ने बताई सच्चाई
वित्त मंत्रायल की और इस इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी गई और एक प्रेस नोट भी जारी किया। वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि सरकार मंदिरों के गोल्ड रिजर्व के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी करने की योजना बना रही है। ये दावे पूरी तरह से गलत, भ्रामक और बिना किसी आधार के किए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर किया था दावा
सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और वीडियो में दावा किया जा रहा था कि सरकार मंदिरों में जमा सोने को अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रही है। कुछ पोस्ट में कहा गया कि सरकार आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए मंदिरों के सोने का इस्तेमाल करेगी। सोशल मीडिया पर की गई इन पोस्टों के आधार पर कयास लगाए जाने लगे थे। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने बयान जारी किया। मंत्रालय ने साफ कहा कि सरकार की मंदिरों में रखे सोने पर कोई नजर नहीं है और ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।
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क्या है गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम?
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम यानी GMS की शुरुआत साल 2015 में की गई थी। इसका उद्देश्य घरों और संस्थाओं में पड़े निष्क्रिय सोने को आर्थिक व्यवस्था में लाना था। इस योजना के तहत लोग अपना सोना बैंक में जमा कर सकते हैं और बदले में ब्याज पा सकते हैं। सरकार ने कहा कि गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम पूरी तरह स्वैच्छिक योजना है। इसमें कोई भी व्यक्ति, संस्था या धार्मिक संगठन अपनी इच्छा से सोना जमा कर सकता है। किसी पर कोई दबाव नहीं डाला जाता। मंत्रालय के मुताबिक मंदिरों के सोने को जबरन लेने या उसे सरकारी नियंत्रण में लाने जैसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।












