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फरीदाबाद में पंचायत भवन के नाम पर कागजी खेल:पुरानी दीवार पर प्लास्टर चढ़ाकर डकार गए लाखों, ग्रामीणों का आरोप; धरातल पर काम शून्य


खेसरहा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत फरीदाबाद में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन के निर्माण और मरम्मत कार्य के नाम पर लाखों रुपयों की वित्तीय अनियमितता की गई है। कागजों पर लाखों खर्च दिखा दिए गए, लेकिन धरातल पर काम मानकों के कोसों दूर है। ग्रामीणों ने अब इस पूरे खेल की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि जिस पंचायत भवन को ग्रामीणों की सहूलियत के लिए चमका जाना था, वह आज भी एक ‘शोपीस’ बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, पंचायत भवन की पुरानी चारदीवारी पर केवल ऊपर से प्लास्टर का काम करा दिया गया। सिर्फ इस मामूली मरम्मत को भारी-भरकम काम दिखाकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये का भुगतान करा लिया गया। भवन लंबे समय से बदहाली और उपेक्षा का शिकार है, जिससे इसकी उपयोगिता शून्य बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीण राजकुमार चौबे, भगवानदास, आबिद हुसैन, योगेंद्र और अजय चतुर्वेदी पंचायत भवन ग्रामीणों और सार्वजनिक उपयोग की एक बेहद महत्वपूर्ण संपत्ति है। इसमें सरकारी धन का खुला दुरुपयोग हुआ है। इसकी तुरंत निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को जेल भेजा जाना चाहिए। आजाद अधिकार सेना ने खोला मोर्चा, जांच से कतरा रहे अफसर इस पूरे मामले को लेकर राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भी सरगर्मी बढ़ गई है। आजाद अधिकार सेना के जिलाध्यक्ष उपेंद्र चतुर्वेदी ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर मामले की शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर जांच करने नहीं पहुंचा। लगातार शिकायतों के बाद भी चुप्पी साधना, जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि अगर जिला स्तर के आला अधिकारी पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से मौके पर जाकर जांच करें, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। शिकायत मिलते ही होगी कार्रवाई विकास चौधरी, एडीओ पंचायत (खेसरहा) ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। शिकायत की कॉपी मिलते ही संबंधित अभिलेखों (records) और मौके पर हुए निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यदि जांच में किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है, तो नियमानुसार सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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