Homeदेश (National)असम की बाढ़ के लिए नगालैंड के तीन जिले क्यों हैं जिम्मेदार?

असम की बाढ़ के लिए नगालैंड के तीन जिले क्यों हैं जिम्मेदार?

पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य असम इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है। इस बाढ़ ने असम में भारी तबाही मचाई है, जिसमें दर्जनों लोगों के साथ में सैकड़ों जानवरों की मौत हो गई है। आने वाले समय में मौतों का यह आंकड़ो और बढ़ सकता है। लगभग एक हफ्ते में कम से 66 लोगों की जान चली गई है। तकरीबन सात लाख लोग प्रभावित बाढ़ से हुए हैं। इसके अलावा सरकार अभी भी 50,000 से ज्यादा लोगों तक राहत नहीं पहुंचा पाई है। कुल मिलाकर असम इस समय ऐसी बाढ़ की चपेट में है कि जो राज्य में पहले कभी नहीं आई।

तीन सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिले हैं। इन्हीं तीनों जिलों में रहने वाले लाखों लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी ऐसी बाढ़ नहीं देखी। यहां हर दिन इस बची-कुची सूखी जमीन पर भी खतरनाक स्तर पर पानी फैल रहा है।

असम में अबतक कितनी तबाही हुई?

दरअसल, असम के इन तीनों जिलों को लेकर कुल 12 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। 19 जुलाई को सबसे पहले बाढ़ का पानी तेजी से गंभीर स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद से बाढ़ लगातार बढ़ रही है। अब 12 जिलों के 856 गांवों में कुल सात लाख लोग प्रभावित हैं। पूरे गांव-कस्बे, खेती की जमीन और शिवसागर जैसे बड़े शहर छाती तक पानी से भर गए हैं।

सोमवार से असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने 58 मौतें दर्ज की हैं, जिनमें छह बच्चे शामिल हैं। लेकिन अधिकारियों ने बताया है कि जैसे-जैसे तबाही का पूरा हाल सामने आएगा यह संख्या बढ़ने की संभावना है। 1.15 लाख से ज्यादा लोग राहत कैंपों में रह रहे हैं और NDRF, आर्मी, SDRF, फायर और इमरजेंसी सर्विसेज और स्थानीय प्रशासन ने लगभग 4,455 लोगों को बाढ़ वाले इलाकों से नावों से निकाला है।

कई इलाकों में नहीं पहुंची मदद

असम में आई भीषण बाढ़ को लेकर गंभीर बात यह है कि खुद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि पानी का स्तर कम होने के बाद भी सरकार अभी तक नाजिरा विधानसभा क्षेत्र के लगभग 30 फीसदी इलाकों और शिवसागर विधानसभा क्षेत्र के लगभग 20 फीसदी इलाकों तक नहीं पहुंच पाई है। ये दोनों शिवसागर जिले में आते हैं। सीएम ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि बाढ़ का पानी घटने के साथ कई फीट ऊंची मिट्टी की परतें छोड़ रहा है, जिससे इन इलाकों में पैदल या गाड़ी से पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

इस पूरे हफ्ते इस बेल्ट से बहने वाली ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियां अपने खतरे के स्तर से काफी ऊपर बह रही हैं। शनिवार तक शिवसागर में दिखो, नांगलामोराघाट में दिसांग और नुमालीगढ़ में धनसिरी नदियां गंभीर बाढ़ की स्थिति में बह रही थीं।

बाढ़ की वजह मौसम की कौन सी घटनाएं हैं?

असम सरकार ने शुरू में बाढ़ की वजह 19 जुलाई को नागालैंड के पहाड़ी जिले मोन में बादल फटना बताया था। हालांकि, नागालैंड की राजधानी कोहिमा के मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, मोन जिले में बादल नहीं फटा था बल्कि एक घंटे के भीतर ही 100 mm से ज्यादा मूसलाधार बारिश हुई थी। इस दिन आठ से नौ घंटे में 137 mm की भारी बारिश दर्ज की गई थी। इससे मोन जिले के पहाड़ी इलाकों में कई जगहों पर लैंडस्लाइड हुए, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी।

सुरक्षित जगहों पर ठिकाना ढूंढ रहे लोग

मंगलवार को असम के शिवसागर जिले में बाढ़ से प्रभावित इलाके में लोग सुरक्षित जगहों पर जाकर ठिकाना ढूंढ रहे हैं। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि 18 और 19 जुलाई के दौरान नागालैंड के तीन जिलों वोखा, मोकोकचुंग और मोन और असम के पहाड़ी जिले चराईदेव में हुई बारिश सामान्य स्तर से काफी ज्यादा हुई थी। चराईदेव में 436% और मोकोकचुंग में 493% ज्यादा बारिश हुई।

बाढ़ के पानी से निपटना चुनौती भरा

सीएम का कहना है कि इस वजह से पानी का स्तर जिस तेजी से बढ़ा, वह असामान्य था। सीएम ने कहा कि इस बाढ़ के पानी से निपटना चुनौती भरा है। दरअसल, ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर से ही बढ़ा हुआ है। यही बढ़ा हुआ जलस्तर सहायक नदियों के पानी को ब्रह्मपुत्र नदी में जाने से रोक रहा है।

इसके अलावा असम और इसके आसपास की नदियों में बहुत बड़ी मात्रा में खुदाई हो रही है। इस खुदाई की वजह से बहुत सारा कीचड़ नीचे बह रहा है जिससे नदी की पानी बहाने की क्षमता कम हो रही है। साथ ही नदियों के आसपास के जंगलों में अंधाधुन पेड़ों की कटाई हो रही है, जिसपर किसी जिम्मेदार का ध्यान नहीं है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments