महराजगंज में जल संरक्षण और विकास का प्रतीक बनने वाला अमृत सरोवर अब महराजगंज के सिसवा में हादसे की वजह बन गया। निर्माणाधीन अमृत सरोवर में डूबने से तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। हादसे के बाद जहां परिवारों में मातम पसरा है, वहीं निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य जल संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और बेहतर जल स्रोत उपलब्ध कराना है। लेकिन सिसवा नगरपालिका क्षेत्र के मीराबाई नगर वार्ड में बन रहा यही सरोवर अब लोगों के बीच ‘मौत का सरोवर’ के नाम से चर्चा में है। मृतकों की फाइल फोटो… जानकारी के मुताबिक, रविवार दोपहर चार बच्चे निर्माणाधीन सरोवर में नहाने पहुंचे थे। इसी दौरान गहरे पानी में जाने से नीतीश यादव (12), रोहन (13) और कृष्णा रौनियार (15) डूब गए। वहीं राजबीर (13) किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया और उसने लोगों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस और गोताखोर मौके पर पहुंचे और तीनों बच्चों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस सरोवर के आसपास न तो बैरिकेडिंग की गई थी, न चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे और न ही लोगों की आवाजाही रोकने के लिए कोई सुरक्षा कर्मी तैनात था। गहरे पानी वाले निर्माणाधीन क्षेत्र को खुला छोड़ दिया गया था, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई थी। पहले भी उठ चुके थे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल इस परियोजना पर पहले भी सवाल उठ चुके थे। 20 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी को अमृत सरोवर निर्माण में कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। इसके बाद जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। अब उसी परियोजना में तीन बच्चों की मौत होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए जाते तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। डीएम ने दिए एफआईआर और जांच के निर्देश हादसे की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य में अनियमितताओं की बात स्वीकार करते हुए निर्माण एजेंसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, पूरे मामले की जांच कराने और तत्काल बैरिकेडिंग कराने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि निर्माणाधीन सरोवर चारों ओर से खुला था, जिसके कारण दुर्घटना की संभावना बनी हुई थी। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। चार-चार लाख रुपए की सहायता घोषित प्रशासन की ओर से मृतक बच्चों के परिजनों को दैवीय आपदा राहत निधि से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। हालांकि, हादसे के बाद लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सुरक्षा में लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और दोषियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर टिकी है। यदि जांच में लापरवाही या निर्माण संबंधी अनियमितताएं सामने आती हैं, तो यह मामला सरकारी योजनाओं में सुरक्षा और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा साबित होगा।
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महराजगंज में अमृत सरोवर बना ‘मौत का सरोवर’:3 मासूमों की डूबने से जान गई, निर्माण में भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच गुणवत्ता पर सवाल
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