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फार्मासिस्टों के भारत बंद का व्यापक असर:ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने समर्थन में क्लीनिक बंद कीं, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

#बस्ती_न्यूज

बस्ती जनपद के कलवारी क्षेत्र सहित पूरे उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन द्वारा घोषित भारत बंद का व्यापक असर दिखा। इस बंद के समर्थन में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने भी अपनी क्लीनिक बंद रखीं, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कलवारी, बहादुरपुर, नगर बाजार, अगौना और फुटहिया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही अधिकांश निजी क्लीनिक बंद रहे। आमतौर पर छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए स्थानीय क्लीनिकों पर निर्भर रहने वाले मरीजों को इलाज के लिए दूर के सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। इससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर मरीजों की भीड़ अचानक बढ़ गई। मरीजों और उनके परिजनों को घंटों लाइन में लगकर इलाज कराना पड़ा। कई जगहों पर दवाइयों और चिकित्सकीय परामर्श के लिए भी भारी भीड़ देखी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित परिवहन व्यवस्था के कारण मरीजों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों वाले परिवार विशेष रूप से प्रभावित हुए। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने इस आंदोलन के समर्थन में कहा कि फार्मासिस्टों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही है। इसी कारण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए इस बंद का समर्थन किया है। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम त्रिपाठी ने बताया कि यह बंद केवल प्रतीकात्मक समर्थन है। उन्होंने जोर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक जिम्मेदारी बड़ी संख्या में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक निभाते हैं। डॉ. त्रिपाठी ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने पूर्ण रूप से अपनी सेवाएं बंद कर दीं, तो सरकार को उनकी उपयोगिता और आवश्यकता का वास्तविक एहसास होगा। उन्होंने कहा, ‘आज केवल समर्थन स्वरूप क्लीनिक बंद रखी गई हैं। जिस दिन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने पूरी तरह कार्य बंद कर दिया, उस दिन ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी।’
#बस्ती न्यूज़ टुडे

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