- 10 अगस्त को देश भर में विरोध प्रदर्शन
नई दिल्ली/लखनऊ। नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आज आयोजित राष्ट्रीय श्रमिक-किसान सम्मेलन में देश के 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, विभिन्न स्वतंत्र फेडरेशनों, क्षेत्रीय श्रमिक संगठनों तथा संयुक्त किसान मोर्चा ने सर्वसम्मति से श्रमिकों, किसानों एवं सार्वजनिक क्षेत्र को बचाने के लिए राष्ट्रव्यापी संयुक्त संघर्ष का निर्णय लिया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने सम्मेलन के निर्णयों का स्वागत करते हुए कहा है कि यह सम्मेलन देश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण, विद्युत संशोधन विधेयक-2025, चार श्रम संहिताओं तथा सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश एवं निजीकरण के विरुद्ध एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का आधार बनेगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि सम्मेलन में स्पष्ट निर्णय लिया गया कि जहाँ-जहाँ बिजली के निजीकरण के विरुद्ध आंदोलन चल रहे हैं, वहाँ संयुक्त किसान मोर्चा तथा सभी 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनें पूरी ताकत से उन आंदोलनों का समर्थन करेंगी। बिजली क्षेत्र को बचाने का संघर्ष अब केवल बिजली कर्मचारियों का संघर्ष नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं का साझा राष्ट्रीय आंदोलन बनेगा।
सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि पहले चरण में 10 अगस्त 2026 को पूरे देश के सभी जनपदों तथा राज्य मुख्यालयों पर किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों के संयुक्त प्रदर्शन, विरोध सभाएँ एवं अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों को संयुक्त किसान मोर्चा, सभी 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनें तथा विभिन्न क्षेत्रीय एवं स्वतंत्र कर्मचारी संगठन संयुक्त रूप से संचालित और समर्थन करेंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली का निजीकरण देश की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों के हित, आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। निजीकरण से बिजली महंगी होगी, ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित होगी, क्रॉस सब्सिडी की व्यवस्था समाप्त होगी तथा लाखों कर्मचारियों एवं संविदा कर्मियों का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा। इसी प्रकार चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों के संगठन बनाने, हड़ताल करने, सामूहिक सौदेबाजी करने तथा सुरक्षित रोजगार के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आह्वान किया है कि वे 10 अगस्त के संयुक्त राष्ट्रव्यापी आंदोलन को ऐतिहासिक सफलता प्रदान करें तथा बिजली क्षेत्र के निजीकरण और श्रमिक विरोधी नीतियों के विरुद्ध व्यापक जनसमर्थन तैयार करें। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार ने बिजली के निजीकरण, विद्युत संशोधन विधेयक-2025 तथा श्रमिक विरोधी नीतियों को वापस नहीं लिया, तो देशभर में किसानों, मजदूरों और बिजली कर्मचारियों का संयुक्त आंदोलन और अधिक व्यापक तथा निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।












