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उन्नाव, स्लॉटर हाउसों पर फिर उठे सवाल! फिट फॉर ट्रेवल सर्टिफिकेट और टैगिंग रिकॉर्ड में जमकर गड़बड़ी करने के आरोप

उन्नाव। जिले में संचालित स्लॉटर हाउसों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूर्व में शासन स्तर से जारी पत्रों में फिट फॉर ट्रेवल सर्टिफिकेट, पशुओं की टैगिंग और आगमन पंजिका में अनियमितताओं का उल्लेख किया जा चुका है। अब एक बार फिर रिकॉर्ड व्यवस्था और प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार कई स्लॉटर हाउसों में स्थानीय समेत बाहरी जनपदों से बड़ी संख्या में पशु कंटेनरों के माध्यम से लाए जाते हैं, लेकिन उनके फिट फॉर ट्रेवल सर्टिफिकेट और टैगिंग रिकॉर्ड में भारी अंतर होने की आशंका जताई जा रही है।आरोप है कि रिकॉर्ड में सीमित प्रमाणपत्र दिखाए जाते हैं, जबकि वास्तविक संख्या अलग हो सकती है। चर्चा यह भी है कि निष्पक्ष एवं गोपनीय जांच होने पर कई सवाल सुलझ सकते है। इस भ्रष्टाचार को पनपाने के लिए कुछ बाहरी लोग भी सक्रिय है। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ साथ पशुओं की ट्रेसिंग और निगरानी व्यवस्था भी प्रभावित होने की संभावना है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। सालो से चल रहे इस भ्रष्टाचार पर कई बार संगठन के लोगो ने आवाज़ ऊपर पहुंचाई लेकिन स्थानीय तंत्र ने बार बार जांच को भ्रमित कर स्वयं को बचाता नजर आया। 

पशुपालन विभाग संगठन से जुड़े प्रदेश अध्यक्ष ने कह दी बड़ी बात…

पशुपालन विभाग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मनोज कुमार डांगर ने दावा किया कि फिट फॉर ट्रेवल सर्टिफिकेट से जुड़ी सबसे अधिक शिकायतें उन्नाव, अलीगढ़ और आगरा जनपदों से मिली हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में जारी शासनादेश के तहत कटान होने वाले प्रत्येक पशु पर 45 रुपये की लेवी जमा कराने का प्रावधान किया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में लगभग 140 करोड़ रुपये की रिकवरी निकाली गई थी, लेकिन मामला फाइलों में दब गया। उनका कहना है कि लेवी का राजस्व सरकार को नहीं मिल रहा है और सुविधा शुल्क के चलते अनियमितताएं कराई जा रही हैं।
“फिट फॉर ट्रेवल प्रमाणपत्र जारी करने के नियमों का हो रहा उल्लंघन”
मनोज कुमार डांगर ने कहा कि नियमों के अनुसार फिट फॉर ट्रेवल सर्टिफिकेट वही पशु चिकित्सक जारी कर सकता है, जिसके क्षेत्र में पशु बाजार लगता हो। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग जनपदों से आने वाले पशुओं के प्रमाणपत्रों में भी अनियमितताएं की जा रही हैं और डॉक्टरों की मिलीभगत से पूरा खेल संचालित हो रहा है।
उन्होंने बताया कि 7 मई को अपर मुख्य सचिव से व्यक्तिगत रूप से मिलकर शिकायत पत्र दिया गया था, जिस पर विशेष सचिव स्तर से जांच के आदेश दिए गए हैं।

पूर्व में डीएम गौरांग राठी के निरीक्षण में भी सामने आई थीं अनियमितताएं

उन्नाव। यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले 2 जून 2025 की रात तत्कालीन जिलाधिकारी गौरांग राठी ने इण्डाग्रो फूड्स पशुवधशाला का औचक निरीक्षण किया था, जिसमें कई गंभीर खामियां सामने आई थीं।
निरीक्षण के दौरान रात 11:35 बजे पशुओं से लदा वाहन बिना चेकिंग और एंट्री के सीधे परिसर के अंदर पहुंच गया था। वहीं पशुओं की लोडिंग के समय चिकित्सकीय प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे। हलाल डिवीजन में सीसीटीवी कैमरे नहीं मिले थे और ऑनलाइन रिकॉर्डिंग भी कलेक्ट्रेट तक नहीं पहुंच रही थी।
मामले में तत्कालीन पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विमल कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया था। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें पद से हटा दिया गया था।

निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड सत्यापन की उठी मांग
लगातार सामने आ रहे आरोपों और पूर्व में मिली अनियमितताओं के बाद अब स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। लोगों का कहना है कि रिकॉर्डों का निष्पक्ष सत्यापन कर पूरे मामले की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आये।

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