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ऊर्जा निगमों में जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल के गठन की संघर्ष समिति ने की मांग

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि ऊर्जा निगमों में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच संवादहीनता के कारण औद्योगिक वातावरण पूरी तरह प्रभावित हो चुका है।

औद्योगिक शांति एवं स्वस्थ कार्य वातावरण की पुनर्स्थापना के लिए ऊर्जा निगमों में जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल (Joint Management Council) का तत्काल गठन किया जाए तथा विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश सहित सभी श्रम संघों एवं सेवा संगठनों के साथ प्रत्येक माह नियमित वार्ता की जाए। यह व्यवस्था प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा जारी निर्देशों की भावना के अनुरूप भी है।

संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के समय जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल नियमित रूप से कार्य करती थी। इसकी मासिक बैठकों की अध्यक्षता विद्युत परिषद के अध्यक्ष करते थे। परिषद के सभी मान्यता प्राप्त श्रम संघों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होते थे तथा उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ एवं राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र के प्रतिनिधि आमंत्रित सदस्य के रूप में भाग लेते थे। इससे विभिन्न समस्याओं का समयबद्ध समाधान होता था तथा औद्योगिक शांति बनी रहती थी।

संघर्ष समिति ने बताया कि वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के विघटन के समय प्रदेश सरकार के साथ हुए लिखित समझौते में स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था की गई थी कि पूर्व की भांति जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल का गठन किया जाएगा और यह व्यवस्था ऊर्जा निगमों में भी जारी रहेगी। विघटन के बाद प्रारंभिक वर्षों में ऊर्जा निगमों में जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल का गठन किया गया तथा इसकी नियमित बैठकें भी आयोजित होती थीं, जिनमें सभी श्रम संघों के प्रतिनिधियों के साथ अभियंता संघ एवं जूनियर इंजीनियर्स संगठन के प्रतिनिधि आमंत्रित सदस्य के रूप में भाग लेते थे।

संघर्ष समिति ने कहा कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ऊर्जा निगमों के 16 प्रमुख श्रम संघों एवं सेवा संगठनों का संयुक्त मंच है। अत्यंत खेद का विषय है कि वर्तमान पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने पिछले तीन वर्षों में संघर्ष समिति के साथ एक बार भी औपचारिक वार्ता करना आवश्यक नहीं समझा। यह स्थिति औद्योगिक संबंधों की दृष्टि से अत्यंत चिंताजनक है।

संघर्ष समिति ने कहा कि संवादहीनता तथा सामान्य लोकतांत्रिक धरना-प्रदर्शनों के कारण बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं के विरुद्ध की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई से ऊर्जा निगमों का औद्योगिक वातावरण लगातार बिगड़ रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव विद्युत व्यवस्था एवं उपभोक्ता सेवाओं पर भी पड़ रहा है।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि कर्मचारियों एवं अभियंताओं के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां तत्काल वापस ली जाएं, ऊर्जा निगमों में जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल का पुनर्गठन किया जाए तथा इसमें सभी श्रम संघों के प्रतिनिधियों के साथ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ एवं राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों को आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाए। साथ ही सभी कर्मचारी एवं सेवा संगठनों के साथ नियमित मासिक संवाद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे औद्योगिक शांति बहाल हो  और ऊर्जा निगमों का कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सके।

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