सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत सामने आने के बाद डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने कड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। बुधवार को विकास खंड उसका बाजार के कंपोजिट विद्यालय करमा में आयोजित बीएचएनडी (ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस) के निरीक्षण में भारी लापरवाही उजागर हुई। इस पर डीएम ने मौके पर ही आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने और उनसे स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी में ढिलाई बरतने के लिए एमओआईसी (चिकित्सा अधिकारी प्रभारी) से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल में कई खामियां सामने आईं। जिलाधिकारी ने एएनएम से गर्भवती महिलाओं की जांच और उन्हें मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। जांच में पाया गया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) का चिह्नीकरण बेहद कम था। इस गंभीर चूक पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे स्वास्थ्य तंत्र की बड़ी लापरवाही बताया। उन्होंने मौके पर मौजूद गर्भवती महिलाओं से सीधे संवाद कर यह भी सुनिश्चित किया कि उन्हें बीएचएनडी दिवस पर निर्धारित सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। आंगनबाड़ी केंद्र पर अभिलेखों की जांच में भी अनियमितताएं मिलीं। सैम-मैम (गंभीर तीव्र कुपोषण-मध्यम तीव्र कुपोषण) बच्चों के रजिस्टर की समीक्षा के दौरान पोषाहार वितरण व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई। जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए कि कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को हर हाल में समय पर पोषाहार उपलब्ध कराया जाए और बीएचएनडी दिवस पर गोदभराई कार्यक्रम अनिवार्य रूप से आयोजित किया जाए।
सिद्धार्थनगर डीएम ने बीएचएनडी निरीक्षण में की कार्रवाई:आशा-आंगनबाड़ी का वेतन रोका, एमओआईसी से मांगा स्पष्टीकरण
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