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जिले के मयनागुड़ी के पास हुए बस हादसे में छह लोगों की चली गई जान 

जलपाईगुड़ी । जिले के मयनागुड़ी के पास हुए बस हादसे में छह लोगों की जान चली गई, जिनमें एक मासूम बच्चा भी शामिल है। हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। हादसा उस समय हुआ जब राज्य में विकास के रोडमैप पेश किए जाने की तैयारी चल रही थी। ऐसे में यह दुर्घटना कई सवाल खड़े करती है—खासतौर पर यात्री सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था को लेकर। मृतक सभी यात्री उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम (एनबीएसटीसी) की बस में सवार थे। हर दुर्घटना के बाद जांच की घोषणा की जाती है, जिससे कुछ समय के लिए जनाक्रोश शांत हो जाता है।

इस मामले में भी दुर्घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद एनबीएसटीसी अधिकारियों ने चालक को क्लीन चिट दे दी, जो संदेह पैदा करता है। क्योंकि अधिकांश यात्रियों ने चालक पर ही लापरवाही का आरोप लगाया है। कुछ का कहना है कि चालक पूरी तरह स्वस्थ नहीं था, तो कुछ ने बस की तेज रफ्तार को हादसे की वजह बताया।

अस्पताल में भर्ती यात्रियों के अनुसार, उन्होंने कई बार चालक से गति कम करने का अनुरोध किया, यहां तक कि बस रोककर उसे आराम करने की सलाह भी दी गई, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। हालांकि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद चालक ने खुद को निर्दोष बताया और बस में तकनीकी खराबी की बात कही।

कंडक्टर का कहना है कि टायर फटने के कारण बस नियंत्रण से बाहर हो गई। यदि तकनीकी खराबी की बात सही है, तो एनबीएसटीसी की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठते है। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त बस केवल दो साल पुरानी थी। ऐसे में उसकी देखरेख और फिटनेस को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हाल ही में परिवहन राज्य मंत्री आनंदमय बर्मन ने घोषणा की है कि अब बस चलाने से पहले चालकों की शारीरिक और मानसिक जांच की जाएगी। लेकिन यह भी सवाल है कि क्या एनबीएसटीसी के पास इतनी बड़ी संख्या में चालकों की नियमित जांच के लिए पर्याप्त संसाधन और व्यवस्था मौजूद है?

दरअसल, परिवहन निगम पहले से ही वित्तीय संकट और संसाधनों की कमी से जूझ रहे है। बसों की संख्या सीमित है, रखरखाव के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं है और प्रशासनिक स्तर पर भी कमी है। डिपो में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे है। इन सभी समस्याओं के बीच यात्री सुरक्षा अक्सर पीछे छूट जाती है।

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