नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सोमनाथ मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की अपराजित आस्था, संस्कृति और सभ्यता का जीवंत प्रतीक है। पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर 11 मई को वहां जाने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे अपने लिए सौभाग्य बताया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा अपने लेख में कहा कि सोमनाथ का इतिहास संघर्ष, पुनर्जागरण और आत्मबल की प्रेरणादायी गाथा है। उन्होंने कहा कि समुद्र तट पर स्थित यह पावन धाम देश को संदेश देता है कि कितने भी आक्रमण और कठिनाइयां क्यों न आएं, भारत की सांस्कृतिक चेतना को समाप्त नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री ने उन विभूतियों और वीरों को नमन किया जिन्होंने विभिन्न कालखंडों में सोमनाथ की रक्षा और पुनर्जीवन के लिए संघर्ष किया। उन्होंने महाराज धारसेन चतुर्थ, भीम प्रथम, राजा भोज, कुमारपाल सोलंकी, अहिल्याबाई होल्कर सहित अनेक ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के योगदान को याद किया। साथ ही वीर हमीरजी गोहिल और वीर वेगड़ाजी भील के साहस को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। वर्ष 1951 में मंदिर का पुनर्निर्माण पूरा हुआ और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन समारोह में भाग लेकर इसे ऐतिहासिक स्वरूप दिया।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। काशी विश्वनाथ धाम, केदारनाथ मंदिर, राम मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास से सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिली है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सोमनाथ धाम की यात्रा करने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की उस सभ्यतागत चेतना का प्रतीक है जिसने हर चुनौती के बावजूद अपनी पहचान और परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखा।












