महराजगंज। उत्तर प्रदेश में जहां ‘जीरो टॉलरेंस’ और महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं जनपद के निचलौल थाना क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो न्याय व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली है। एक पिता जब अपनी बेटी की अस्मत और न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो, और पुलिस उसे न्याय देने के बजाय अपमानित करे, तो सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल उठना लाजमी है।
दबंगई का नंगा नाच और पुलिस की ‘कूलर वाली’ खातिरदारी
मामला बरोहिया का है, जहां मनमोहन गुप्ता नामक युवक पर एक लड़की का अश्लील वीडियो वायरल करने, छेड़छाड़ और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगा है। विडंबना देखिए कि बीते 3 मई को ग्रामीणों ने आरोपी को एक मामले में रंगे हाथों पकड़कर पुलिस के हवाले किया था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर निचलौल पुलिस ने उसे ‘मेहमान’बना दिया। पीड़िता के पिता का आरोप है कि पुलिस आरोपी को थाने बुलाकर कूलर की हवा खिलाती है और शाम को ससम्मान विदा कर देती है।
तहरीर बदलने का दबाव: रक्षक ही बने भक्षक
घटना की पराकाष्ठा तब हुई जब 10 मई को पीड़ित लड़की स्वयं अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंची। आरोप है कि पुलिस ने आरोपी पर कार्रवाई करने के बजाय लड़की को ही तहरीर बदलने का दबाव बनाया और उसे वापस लौटा दिया। पुलिस की इस कार्यप्रणाली ने न केवल आरोपी के हौसले बुलंद किए हैं, बल्कि पीड़ित परिवार को गहरे मानसिक अवसाद में धकेल दिया है।
> *”जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और थाने में न्याय का गला घोंटा जाने लगे, तो पीड़ित आखिर कहां जाए?”* — यह सवाल आज हर महराजगंज वासी पूछ रहा है।
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*अपराधों का पुराना इतिहास, फिर भी पुलिस मेहरबान।*
बताते चलें कि आरोपी मनमोहन गुप्त का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पूर्व भी निचलौल की एक दुकान और विद्यालय में चोरी के आरोप उस पर लग चुके हैं। लेकिन हर बार किसी न किसी दबाव में उसे बचा लिया गया। अब पुलिस की इस ‘अति-सक्रियता’ (आरोपी को बचाने में) ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके कारण विवश होकर पीड़ित पिता को सोमवार को कप्तान की चौखट पर न्याय की गुहार लगानी पड़ी।
समाज में भारी आक्रोश
निचलौल पुलिस की इस ‘रसूखदार भक्ति’ से समाज में भारी रोष है। क्या पुलिस प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या आरोपी का प्रभाव कानून से बड़ा है? उच्चाधिकारियों को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर न केवल आरोपी पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि उन पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरानी चाहिए जो न्याय की राह में रोड़ा बने हुए हैं।
खाकी पर दाग: निचलौल पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, क्या रसूख के आगे घुटने टेक चुका है सिस्टम?
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