HomeHealth & Fitnessलापता युवक की तलाश में एआई तकनीक का सहारा, हाईकोर्ट ने दिए...

लापता युवक की तलाश में एआई तकनीक का सहारा, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

जोधपुर। आठ साल से लापता नरेश बंजारा की गुमशुदगी का रहस्य सुलझाने के लिए राजस्थान उच्च् न्यायालय ने न केवल मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है, बल्कि पहली बार आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का रास्ता भी सुझाया है।

हाईकोर्ट ने कहा है कि चूंकि नरेश को लापता हुए आठ साल से अधिक समय बीत चुका है, इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उसकी वर्तमान संभावित उम्र के अनुसार तस्वीर तैयार की जाए और उसे देशभर के समाचार चैनलों, अखबारों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए। अदालत का मानना है कि तकनीक की यह पहल नरेश तक पहुंचने की नई उम्मीद बन सकती है।

मामला जोधपुर के रहने वाले नरेश बंजारा का है, जो 25 नवंबर 2017 की शाम घर से निकला था और फिर कभी वापस नहीं लौटा। उस समय वह बारहवीं कक्षा का छात्र था और उसकी सगाई महज पांच दिन बाद होने वाली थी।

परिवार का कहना है कि सगाई से ठीक पहले उसका अचानक गायब होना सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश की आशंका शुरू से रही।

इन आठ वर्षों में पिता केतन बंजारा ने पुलिस थानों से लेकर अदालतों तक हर दरवाजा खटखटाया। गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई, बाद में अपहरण, हत्या और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में एफआईआर भी दर्ज हुई।

जांच पुलिस से एसआईटी तक पहुंची, हाईकोर्ट के निर्देशों पर तकनीकी जांच की बातें भी हुईं, लेकिन नरेश का कोई सुराग नहीं मिल सका। इतना ही नहीं, परिवार को न्याय की मांग के लिए लंबा आंदोलन भी करना पड़ा।

बावजूद इसके, जांच एजेंसियां किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकीं। आखिरकार जब मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने जांच की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।

जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि बार-बार के न्यायिक निर्देश, विशेष जांच दल का गठन और वर्षों तक चली जांच के बावजूद युवक का पता नहीं चलना जांच की प्रभावशीलता पर प्रश्न खड़े करता है।

अदालत ने माना कि इतने लंबे समय बाद भी सच सामने नहीं आना पीडि़त परिवार के विश्वास को प्रभावित करता है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने जोधपुर में दर्ज गुमशुदगी रिपोर्ट और एफआईआर दोनों मामलों की आगे की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।

अदालत ने पुलिस और संबंधित अदालत को भी निर्देश दिए कि केस डायरी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य सभी दस्तावेज सीबीआई को उपलब्ध कराए जाएं। इस पूरे मामले का सबसे उल्लेखनीय पहलू अदालत द्वारा दिया गया एआई तकनीक का सुझाव है।

न्यायालय ने माना कि आठ वर्षों में किसी व्यक्ति के चेहरे में स्वाभाविक रूप से बदलाव आ जाता है। ऐसे में एआई आधारित ‘एज प्रोग्रेशन’ तकनीक से नरेश की वर्तमान संभावित तस्वीर तैयार कर देशव्यापी स्तर पर प्रसारित किया जाना चाहिए।

 

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments