कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से कहा है कि वह अपना रजिस्ट्रेशन कराए और समाज के सामने अपनी कानूनी स्थिति को साफ करे। मंत्री ने संघ से अपनी कमाई के जरिया, कुल आय, खर्च और संपत्तियों का खुलासा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े संगठन को देश के कानून और संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और अपने काम में पारदर्शिता रखना चाहिए।
RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रियांक खरगे ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने संगठन के पंजीकरण, वित्तीय स्रोतों और कानूनी स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह पत्र अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर भी शेयर किया है।
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https://twitter.com/PriyankKharge/status/2066458794276913211
पंजीकरण और कानूनी स्थिति पर उठाए सवाल
प्रियांक खरगे ने कहा कि RSS दावा करता है कि उसके देश-विदेश में 60 हजार से ज्यादा शाखाएं हैं और करोड़ों स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं। ऐसे में संगठन को साफ-साफ बताना चाहिए कि वह आखिर किस कानूनी व्यवस्था के तहत काम कर रहा है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि RSS को अपने 100वें साल को सिर्फ जश्न मनाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि इस मौके पर आत्ममंथन करना चाहिए और अपनी जवाबदेही भी बढ़ानी चाहिए। खरगे ने संगठन से अपील की कि वह अपना पंजीकरण कराए और अपनी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जनता के सामने सार्वजनिक करे।
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संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग
प्रियांक खरगे ने RSS से उसके वित्तीय स्रोतों, दान, योगदान, आमदनी-खर्च और संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करने को कहा है। उन्होंने पूछा कि जब गैर-सरकारी संगठन (NGO), ट्रस्ट, कंपनियां और अन्य संस्थाएं कानून के तहत पंजीकरण और जानकारी देने के लिए बाध्य हैं तो RSS को इससे छूट क्यों मिलनी चाहिए। पत्र में उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों, अधिकृत प्रतिनिधियों और प्रशासनिक ढांचे की जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की है।
कर्नाटक में RSS की गतिविधियों का दिया हवाला
प्रियांक खरगे ने कहा कि RSS की 2025-26 की कर्नाटक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडलियां संचालित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक RSS ने कर्नाटक में 2,194 सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें करीब 19.61 लाख लोग शामिल हुए। इसके अलावा 562 पथ संचलनों में लगभग 2.21 लाख लोगों ने भाग लिया। खरगे का कहना है कि इतनी व्यापक गतिविधियों वाले संगठन को निजी या अनौपचारिक समूह नहीं माना जा सकता। इसलिए उसकी वित्तीय और कानूनी जवाबदेही भी स्पष्ट होनी चाहिए।
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मोहन भागवत से मांगा औपचारिक जवाब
प्रियांक खरगे ने अपने पत्र में यह भी पूछा कि RSS की गतिविधियां बिना औपचारिक पंजीकरण के किस कानूनी आधार पर संचालित हो रही हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि संगठन सभी लागू टैक्स का भुगतान कर रहा है या नहीं। उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत से इन सवालों पर औपचारिक जवाब देने का अनुरोध किया है। फिलहाल इस पत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।












