कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के विरोध में 24 जुलाई को कोलकाता में निकाली गई रैली के दौरान पत्रकारों पर हुए हमले के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार से तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बुधवार को न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से यह भी पूछा कि सार्वजनिक रैलियों और जुलूसों के दौरान होने वाली हिंसक और अराजक गतिविधियों को रोकने के लिए क्या कोई दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
यह याचिका 24 जुलाई को वामपंथी दलों के छात्र और युवा संगठनों तथा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से आयोजित विरोध रैली के दौरान मीडिया कर्मियों पर हुए हमले को लेकर दायर की गई थी।
याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि उसे छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलनों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को ऐसे प्रदर्शनों में हिंसा और अराजकता रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने चाहिए।
साथ ही, यदि किसी रैली में इस तरह की घटनाएं होती हैं तो उसके लिए संबंधित राजनीतिक दलों या आयोजकों की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर इस मामले में उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
इस मामले में कोलकाता पुलिस ने शुरुआत में पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हमले के आरोप में 16 लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि मंगलवार को कोलकाता की मुख्य महानगर दंडाधिकारी अदालत ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला दिए जाने के बाद सभी 16 आरोपितों को जमानत दे दी।
उधर, राज्य सरकार ने मंगलवार रात एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि 24 जुलाई की संयुक्त रैली में शामिल छात्रों के खिलाफ गिरफ्तारी सहित कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें यह राहत नहीं मिलेगी और उनके मामलों में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।












