धमतरी । आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान और अधिकारों से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सोमवार को सर्व आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में धमतरी पहुंचे। समाज के प्रतिनिधियों ने देश के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहे जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए राष्ट्रपति के नाम एसडीएम धमतरी को ज्ञापन सौंपा।
वहीं सोशल मीडिया पर आदिवासी समाज के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले संस्कार सतपती के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर थाना कोतवाली पुलिस को भी ज्ञापन सौंपा गया।
आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि ‘आदिवासी’ शब्द केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि देश के मूल निवासियों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक पहचान का प्रतीक है। उनका आरोप है कि सार्वजनिक मंच से आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहकर संबोधित करना उनकी मूल पहचान को कमजोर करने का प्रयास है। समाज का कहना है कि संविधान और विभिन्न सरकारी अभिलेखों में आदिवासी समुदाय की पहचान स्पष्ट रूप से स्थापित है, ऐसे में ‘वनवासी’ शब्द का प्रयोग समुदाय की गरिमा और ऐतिहासिक अस्तित्व के अनुरूप नहीं है।
राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि देशभर में आदिवासी समुदाय की संवैधानिक पहचान को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाए तथा शासकीय और सार्वजनिक मंचों पर ‘आदिवासी’ शब्द का ही प्रयोग सुनिश्चित किया जाए। सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष जीवराखन मरई ने कहा कि आदिवासी समुदाय सदियों से अपनी संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करता आया है, इसलिए उसकी पहचान को किसी भी रूप में बदलने या कमजोर करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा।
इसके बाद समाज के प्रतिनिधि थाना कोतवाली पहुंचे और इंटरनेट मीडिया पर आदिवासी समाज के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक एवं अभद्र टिप्पणियां करने वाले संस्कार सतपती के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि संबंधित टिप्पणियों से आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और समुदाय में व्यापक आक्रोश व्याप्त है। समाज के पदाधिकारियों ने पुलिस प्रशासन से आरोपित के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर आईटी एक्ट, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई करने की मांग की। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आदिवासी समाज लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सर्व आदिवासी समाज, आदिवासी युवा संगठन तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से जीवराखन मरई, महेश रावटे, जयपाल सिंह ठाकुर, उदय नेताम, गेवाराम नेताम, सुभाष कतलम, कांशी राम छैदेया, मनराखन लाल ध्रुव, श्याम लाल नेताम, शिव नेताम, कृष्णा मरकाम, संतोष ध्रुव, नरसिंह मंडावी, हरि राम नेताम, भागी ध्रुव, नंदा ध्रुव, चमेली नेताम, भाविका ध्रुव, बालक नेताम, टीकम ध्रुव, खिलेन्द्र ध्रुव, मोहन ध्रुव, रामेश्वर मरकाम, हर्ष मरकाम, सत्यवान पडोटी, तिजेंद्र कुंजाम, बंटी मरकाम, बंसत नेताम, नन्दकिशोर नेताम एवं लेखराम नेताम शामिल रहे।












