Tag: सइस

  • अयोध्या: अत्याधुनिक फारेंसिक साइंस लैब बनकर तैयार, वैज्ञानिक जांच से अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

    अयोध्या: अत्याधुनिक फारेंसिक साइंस लैब बनकर तैयार, वैज्ञानिक जांच से अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

    अयोध्या को मिली अत्याधुनिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला, 48.88 करोड़ की परियोजना का निर्माण पूरा वैज्ञानिक जांच से अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल को मजबूती, पुलिस जांच होगी और सटीक

    अयोध्या। उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या में आधुनिक अपराध अन्वेषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन और सुरक्षा विजन के तहत 48.88 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ‘बी’ श्रेणी की विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फारेंसिक साइंस लेबोरेट्री) का निर्माण अयोध्या में स्थित बाग बिजेसी में कार्य लगभग पूरा हो चुका है।

    यह हाईटेक लैब अब डीएनए परीक्षण, साइबर फॉरेंसिक, बैलिस्टिक जांच और अन्य वैज्ञानिक तकनीकों से लैस होकर अयोध्या सहित आसपास के जिलों में अपराध जांच को नई रफ्तार देगी।

    गृह (पुलिस) विभाग के फंडिंग से चल रही इस योजना की स्वीकृत लागत 48.88 करोड़ रुपये है। कार्यदाई संस्था लोक निर्माण विभाग ने 7 नवंबर 2023 को शुरू किया था।

    विधि विज्ञान प्रयोगशाला के चार मंजिला भवन का कुल क्षेत्रफल 10,266.40 वर्ग मीटर है। इसमें डोरमेट्री, गेस्ट हाउस, गैरेज, ड्राइवर्स रूम, वर्कशॉप भवन, गार्ड रूम इत्यादि भी रहेंगे।

    लोक निर्माण विभाग (सीडी 2) के अधिशासी अभियंता उमेश चंद्र ने बताया कि फिनिशिंग का कार्य पूरा हो चुका है। अब हैंडओवर की प्रक्रिया चल रही है।

    यह परियोजना न केवल अयोध्या की बुनियादी ढांचागत विकास को मजबूत कर रही है, बल्कि पूरे प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस की क्षमता विस्तार का प्रतीक भी है। शीघ्र ही पूर्ण रूप से चालू होने वाली इस अत्याधुनिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला से अपराध मुक्त और सुरक्षित अयोध्या का सपना और मजबूत होगा।

    अदालतों में सबूतों की विश्वसनीयता बढ़ेगी
    नई प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों से युक्त लैबोरेटरी, डीएनए एनालिसिस यूनिट, साइबर फॉरेंसिक सेंटर, बैलिस्टिक जांच सुविधा, टॉक्सिकोलॉजी और केमिकल परीक्षण कक्ष शामिल हैं।

    यह लैब अपराध स्थल से प्राप्त साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच को सटीक और तेज बनाएगी, जिससे अदालतों में सबूतों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और दोषियों पर शिकंजा कसना आसान होगा।

    पुलिस अफसरों को नई सफलताएं मिलने की उम्मीद
    जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी इस लैब के पूर्ण रूप से ऑपरेशनल होने के बाद अपराध दर को नियंत्रित करने और वैज्ञानिक जांच के आधार पर केसों को सुलझाने में नई सफलताएं हासिल करने की उम्मीद जता रहे हैं।

    मील का पत्थर साबित होगी लैब : एसएसपी
    एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने बताया कि पहले अपराध जांच के लिए लखनऊ या अन्य बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब अयोध्या में स्वयं की हाईटेक फॉरेंसिक सुविधा उपलब्ध हो जाने से जांच प्रक्रिया में काफी तेजी आएगी।

    विशेषकर राम मंदिर, पर्यटन और बढ़ते शहरीकरण के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने में यह लैब मील का पत्थर साबित होगी।

     

  • सीएसजेएमयू की अंतरराष्ट्रीय पुस्तक को मिली वैश्विक पहचान, वेब ऑफ साइंस में हुई अनुक्रमित : प्रो. विनय

    सीएसजेएमयू की अंतरराष्ट्रीय पुस्तक को मिली वैश्विक पहचान, वेब ऑफ साइंस में हुई अनुक्रमित : प्रो. विनय

    कानपुर। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शोध एवं नवाचार संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी। साथ ही साथ शिक्षकों और शोधार्थियों को उत्कृष्ट अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी। यह बातें शुक्रवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।

    कुलपति ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा संपादित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक के वेब ऑफ साइंस के पुस्तक उद्धरण सूचकांक में अनुक्रमित होने पर सभी संपादकों और व्यवसाय प्रबंधन संस्थान के शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की वैश्विक शोध प्रतिष्ठा को नई मजबूती प्रदान करेगी।

    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन संस्थान के शिक्षकों द्वारा संपादित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक ‘वैश्विक चुनौतियों के लिए उद्यमशील समाधान : नवाचार, विकास और सततता’ का प्रकाशन यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान कैम्ब्रिज स्कॉलर्स पब्लिशिंग द्वारा किया गया है। इस पुस्तक को विश्व के प्रतिष्ठित शोध डेटाबेस वेब ऑफ साइंस के पुस्तक उद्धरण सूचकांक में भी अनुक्रमित किया गया है, जिसे शोध गुणवत्ता और वैज्ञानिक उद्धरण का विश्वसनीय वैश्विक मानक माना जाता है।

    इस अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन के लिए विश्वभर से लगभग 140 शोध अध्याय प्राप्त हुए थे। कठोर शैक्षणिक समीक्षा के बाद केवल 24 उच्च गुणवत्ता वाले शोध अध्यायों का चयन प्रकाशन के लिए किया गया। यह उपलब्धि पुस्तक की उत्कृष्ट शैक्षणिक गुणवत्ता और वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण मानी जा रही है।

    पुस्तक में उद्यमिता, नवाचार, सतत विकास, वित्तीय समावेशन, नैतिक नेतृत्व, संकर कार्य संस्कृति तथा उत्तरदायी प्रबंधन जैसे विषयों पर शोध आधारित और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। साथ ही आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के समन्वित मॉडल पर विशेष बल दिया गया है, जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों तथा भारत के विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

    इस पुस्तक का संपादन व्यवसाय प्रबंधन संस्थान के निदेशक प्रो. सुधांशु पंडिया, डॉ. विवेक सिंह सचान, डॉ. संजीव कुमार सिंह तथा डॉ. मयंक जिंदल ने किया है। यह पुस्तक शोधार्थियों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।

     

     

  • संकल्प सेवा संस्थान ने संस्थापक अध्यक्ष का जन्मदिन से:इस अवसर पर वृक्षारोपण, फल वितरण और नानपारा जिला बनाओ पर गोष्ठी हुई

    संकल्प सेवा संस्थान ने संस्थापक अध्यक्ष का जन्मदिन से:इस अवसर पर वृक्षारोपण, फल वितरण और नानपारा जिला बनाओ पर गोष्ठी हुई


    संकल्प सेवा संस्थान उत्तर प्रदेश ने अपने संस्थापक अध्यक्ष समाजसेवी शकील अंसारी का जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया। यह आयोजन पिछले वर्षों की तरह इस साल भी किया गया। इस अवसर पर संस्थान के महामंत्री केशव पाण्डेय, मनोज तिवारी, सुरेश शाह, डी के श्रीवास्तव, सन्त बहादुर वर्मा, आलोक श्रीवास्तव, राम सखी, पूर्व बीजेपी के मण्डल अध्यक्ष आनन्द प्रकाश श्रीवास्तव, परवीन ओलवियर न्यूटन, मोहम्मद अयूब और हलीम अंसारी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शकील अंसारी को बुके देकर बधाई दी। जन्मदिन समारोह के तहत, नगर में मजदूरों को फल वितरित किए गए और उन्हें आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। यह पहल भी पिछले वर्षों की परंपरा का हिस्सा थी। कार्यक्रम में सतरूपा अष्टभुजा दुर्गा मंदिर प्रांगण में चार सहजन और फलदार वृक्षों का रोपण किया गया। इसके बाद, गुड गुड डेयरी में ‘नानपारा को जिला बनाओ’ विषय पर एक गोष्ठी आयोजित की गई, जिसके उपरांत कार्यक्रम का समापन हुआ।

  • यूनीक साइंस एकेडमी में समर कैंप का आयोजन संपन्न

    यूनीक साइंस एकेडमी में समर कैंप का आयोजन संपन्न

    बस्ती – यूनीक साइंस एकेडमी रौता बस्ती में आज दस दिवसीय समर कैंप का आयोजन संपन्न हुआ। जिसमें सभी बच्चों ने ढोलक वादन, हारमोनियम वादन, नृत्य एवं गायन में प्रतिभाग किया। इसमें प्रानवी, ईशा, श्रीजा, वैष्णवी, आराधना, गौरी, आरुषि, सानवी , मंत्रा , कृष्णा ,आराध्या, सुयश , अक्षरा,महिमा, आदित्य ,देवांश, हर्ष कुमार आदि बच्चों शामिल होकर कैंप का आनंद उठाया। इस कैंप में मुख्य रूप से ज्योती श्रीवास्तव, अंशिका जायसवाल के साथ सभी शिक्षक व शिक्षिकाओं का पूर्ण सहयोग रहा।प्रधानाचार्य राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन से पठन- पाठन के साथ साथ शारीरिक एवं बौद्धिक विकास में सहायता मिलती है।

  • स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट साइंस ने एचसीएल गुवी से किया समझौता,ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

    स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट साइंस ने एचसीएल गुवी से किया समझौता,ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

    लखनऊ स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज ने छात्रों को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान ने एचसीएल गुवी (ग्रैब योर वर्नाकुलर इंप्रिंट) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत छात्रों को नई तकनीकों में प्रशिक्षण और बेहतर प्लेसमेंट के अवसर प्राप्त होंगे।

    इस समझौते का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और उद्योग जगत के बीच की दूरी को कम करना है। इसके अंतर्गत छात्रों को कौशल विकास कार्यक्रम, कार्यशालाएं, इंटर्नशिप, औद्योगिक अनुभव और प्लेसमेंट सहायता प्रदान की जाएगी। विशेष रूप से डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,मशीन लर्निंग,क्लाउड कंप्यूटिंग और बिजनेस एनालिटिक्स जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    एमओयू के तहत, छात्रों को बिजनेस एनालिटिक्स और एआई आधारित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। इसमें हैंड्स-ऑन लर्निंग, लाइव प्रोजेक्ट्स, विशेषज्ञ सत्र, प्रमाणन कार्यक्रम और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक अनुभव शामिल होगा।

    संस्थान का मानना है कि इससे छात्र अधिक रोजगारोन्मुखी और उद्योग-तैयार बन सकेंगे। संस्थान के सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शरद सिंह ने बताया कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक कौशल अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि एचसीएल गुवी के साथ यह साझेदारी छात्रों की क्षमताओं को नई दिशा देगी और उन्हें उच्च स्तरीय प्लेसमेंट अवसर दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।

    संस्थान के निदेशक डॉ. आशीष भटनागर ने इस समझौते को शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग का उदाहरण बताया। उन्होंने जानकारी दी कि एमबीए और बी.टेक  के छात्रों को एआई, डेटा साइंस, बिजनेस एनालिटिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जिससे उनके लिए बेहतर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

    एचसीएल गुवी के जनरल मैनेजर एवं हेड इंस्टीट्यूशन बिजनेस विनोद श्रीनिवासन ने कहा कि डिजिटल और उभरती तकनीकी स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में SMS लखनऊ की यह पहल छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस कार्यक्रम में डॉ. भरत राज सिंह, डॉ. जगदीश सिंह, डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र श्रीवास्तव सहित संस्थान के शिक्षकगण, संकायाध्यक्ष और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।

  • सीबीएसई 10वीं दूसरी बोर्ड परीक्षा – साइंस पेपर संपन्न

    सीबीएसई 10वीं दूसरी बोर्ड परीक्षा – साइंस पेपर संपन्न

    प्रतापगढ़। 15 मई से शुरू हुई सीबीएसई 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा में आज 18 मई को साइंस का पेपर हुआ। प्रतापगढ़ के 4 केंद्रों: न्यू एंजिल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, संस्कार ग्लोबल स्कूल, जे एम जी पब्लिक स्कूल कालाकांकर और आइंस्टीन पब्लिक स्कूल लालगंज में परीक्षा सकुशल संपन्न।
     47 स्कूलों के 1538 रजिस्टर्ड छात्रों में से 1443 उपस्थित, 95 अनुपस्थित।
     इस बार साइंस पेपर को प्रथम बोर्ड परीक्षा की भांति फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी के 3 अलग सेक्शन में बाँटा गया। CBSE का सख्त निर्देश: हर सेक्शन के जवाब उसी सेक्शन में लिखने होंगे, वरना कॉपी नहीं जाँची जाएगी।
    पेपर NCERT से सीधा और आसान था। केस बेस्ड और सोर्स बेस्ड सवाल थोड़े मुश्किल, लेकिन कुल मिलाकर पेपर संतुलित।
    न्यू एंजिल्स की चेयरपर्सन डॉ. शाहिदा के मुताबिक अगली परीक्षा 19 मई को हिंदी की होगी। 21 मई को सोशल साइंस के साथ परीक्षा समाप्त।

  • चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी यूपी में ‘एनालिटिका 2026’ का आगाज, एआई और डेटा साइंस पर जुटे देशभर के युवा प्रतिभागी

    चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी यूपी में ‘एनालिटिका 2026’ का आगाज, एआई और डेटा साइंस पर जुटे देशभर के युवा प्रतिभागी

    उन्नाव। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश में मंगलवार को तीन दिवसीय फ्लैगशिप आयोजन ‘एनालिटिका 2026- स्केल विद इंटेलिजेंस’ का भव्य शुभारंभ हुआ। 28 से 30 अप्रैल तक आयोजित यह आयोजन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और एनालिटिक्स की बदलती दुनिया, उनके व्यावहारिक उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित है।
    ‘स्केल विद इंटेलिजेंस’ थीम पर आधारित यह आयोजन छात्रों, शिक्षाविदों, इंडस्ट्री विशेषज्ञों, इनोवेटर्स और पॉलिसी थिंकर्स को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है, जहां ज्ञान-विमर्श, अनुभव साझा करने और नवाचारी समाधानों पर मंथन किया जाएगा। इस विशेष कार्यक्रम में देशभर के 150 से ज्याद मेधावी छात्र – छात्राएं जो की आईआईटी, बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित सेंट्रल और स्टेट यूनिवर्सिटी से संबंधित हैं शामिल हों रहे है। कार्यक्रम के माध्यम से यह रेखांकित किया जा रहा है कि एआई किस प्रकार बिजनेस, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, फाइनेंस और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में परिवर्तन की नई इबारत लिख रही है।
    तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में इंडस्ट्री पैनल डिस्कशन, डोमेन वर्कशॉप्स, करियर रेडीनेस सेशंस, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, प्लेसमेंट टॉक्स और सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे विविध आयाम शामिल किए गए हैं, जिससे यह आयोजन अकादमिक और इंडस्ट्री एंगेजमेंट का प्रभावी मंच बनकर उभर रहा है।
    आयोजन के प्रमुख आकर्षण के रूप में 72 घंटे की राष्ट्रीय हैकाथॉन ‘हैकएक्लिप्स 2026’ की भी शुरुआत की गई, जिसमें देशभर के छात्र एआई आधारित समाधान विकसित करेंगे। यह पहल छात्रों में इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स विकसित करने, रिसर्च एवं इनोवेशन को बढ़ावा देने और यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 
    इसी क्रम में ‘एआई एंड विकसित भारत 2047’ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने एआई आधारित भारत के भविष्य की संभावनाओं को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। यह आयोजन भारत की एआई लीडरशिप को नई दिशा देने और युवा प्रतिभाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
    इस अवसर पर एसएएस एआई एंड डेटा साइंस लैब और एसएएस एक्सपीरियंस सेंटर का शुभारंभ किया गया। एसएएस एआई एंड डेटा साइंस लैब की स्थापना विद्यार्थियों और फैकल्टी को एडवांस्ड एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, डेटा विज़ुअलाइज़ेशन, डीप लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी अत्याधुनिक क्षमताओं से सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई है, साथ ही यह इनोवेशन, रिसर्च, एंटरप्रेन्योरशिप और प्रोफेशनलिज़्म की मजबूत संस्कृति को भी बढ़ावा देगी। यह लैब बेस एंड एडवांस्ड एसएएस प्रोग्रामिंग, विज़ुअल बिज़नेस एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, फोरकास्टिंग एंड ऑप्टिमाइजेशन तथा डेटा क्यूरेशन जैसे ग्लोबली रिकग्नाइज़्ड एसएएस सर्टिफिकेशंस के अनुरूप संरचित प्रशिक्षण प्रदान करेगी, जिससे विद्यार्थियों को इंडस्ट्री-रेलेवेंट स्किल्स, इंटर्नशिप और स्किल्ड जॉब अपॉर्च्युनिटीज़ के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। वहीं, एसएएस एक्सपीरियंस सेंटर को एक इमर्सिव और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड लर्निंग स्पेस के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें हेल्थकेयर, एनर्जी एंड यूटिलिटीज, बैंकिंग एंड फाइनेंस तथा गवर्नेंस जैसे समर्पित डोमेन्स शामिल हैं। क्यूरेटेड केस स्टडीज़ और इंटरएक्टिव एग्ज़िबिट्स के माध्यम से यह सेंटर विद्यार्थियों को एनालिटिक्स के रियल-वर्ल्ड एप्लिकेशंस की व्यावहारिक समझ देगा, साथ ही थियोरेटिकल लर्निंग और इंडस्ट्री एक्सपेक्टेशंस के बीच की दूरी कम करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में डेटा-ड्रिवन डिसीजन मेकिंग की गहरी समझ विकसित करने में सहायक होगा। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि विकास अवस्थी (कॉग्निजेंट) सहित एसएएस एवं अन्य प्रमुख इंडस्ट्री दिग्गज उपस्थित रहे।

    प्रो. (डॉ.) टी.पी. सिंह, प्रो-वाइस चांसलर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, यूपी ने कहा, “आज निर्णय प्रक्रिया पूरी तरह डेटा-ड्रिवन होती जा रही है। हम सभी हर पल डिजिटल फुटप्रिंट्स के माध्यम से विशाल मात्रा में डेटा उत्पन्न कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक महत्व केवल डेटा संग्रहण में नहीं, बल्कि उसके इंटेलिजेंट एनालिसिस में है। यही एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रासंगिकता को और मजबूत बनाता है। ‘एनालिटिका 2026’ विद्यार्थियों को इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, इनोवेशन और रियल-वर्ल्ड प्रॉब्लम सॉल्विंग से जोड़ने का एक सशक्त मंच है। हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, फाइनेंस और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों के अनुभव छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें इंडस्ट्री-रेडी, एजाइल और सॉल्यूशन-ओरिएंटेड प्रोफेशनल्स के रूप में विकसित करना है। मुझे विश्वास है कि ये तीन दिन छात्रों के लिए सीखने, संवाद और नवाचार का अद्वितीय अवसर सिद्ध होंगे।

  • कुछ खास लोगों को ही क्यों काटते हैं मच्छर? जानें इसके पीछे का साइंस

    कुछ खास लोगों को ही क्यों काटते हैं मच्छर? जानें इसके पीछे का साइंस

    गर्मी और बारिश के आते ही मच्छरों का हमला शुरू हो जाता है लेकिन आपने देखा होगा कि कुछ लोगों को मच्छर बहुत ज्यादा काटते हैं, जबकि उनके पास बैठे दूसरे इंसान को वे छूते तक नहीं। यह कोई जादू नहीं है, बल्कि इसके पीछे विज्ञान की एक पूरी कहानी छिपी है। दरअसल, दुनिया में मच्छरों की हजारों प्रजातियां हैं लेकिन उनमें से सिर्फ मादा (फीमेल) मच्छर ही इंसान का खून चूसती हैं।

    उन्हें अपने अंडों को पालने और उन्हें पोषण देने के लिए हमारे खून में मौजूद खास प्रोटीन और आयरन की जरूरत होती है। नर मच्छर तो पेड़ों और फूलों के रस पीकर ही अपना पेट भर लेते हैं। मादा मच्छर हमें ढूंढने के लिए एक बहुत ही खतरनाक तकनीक का इस्तेमाल करती हैं, जिसमें हमारी सांस, पसीने की गंध और हमारे शरीर की गर्मी तक सब कुछ शामिल होता है। वे सिर्फ किसी को भी रैंडमली नहीं काटतीं, बल्कि अपना शिकार बहुत सोच-समझकर चुनती हैं।

    यह भी पढ़ें: पुराने कपड़े पहन-पहन बोर हो गए हैं, अपनाइए ये ट्रिक, हर हफ्ते कर सकते हैं रिपीट

    सांसों की गंध से करती हैं पहचान

    मच्छर हमारी सांसों को बहुत दूर से पहचान लेते हैं। जब हम सांस छोड़ते हैं, तो हमारे शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस बाहर निकलती है। मच्छरों के पास इसे सूंघने के लिए एक खास अंग होता है, जिसकी मदद से वे करीब 100 फीट की दूरी से ही समझ जाते हैं कि आसपास कोई इंसान मौजूद है। यही वजह है कि जिनका शरीर बड़ा होता है या जो लोग ऊंचे कद के होते हैं, उन्हें मच्छर ज्यादा काटते हैं क्योंकि वे छोटे बच्चों के मुकाबले ज्यादा गैस छोड़ते हैं। इसी तरह, गर्भवती महिलाओं को भी मच्छर अपना निशाना ज्यादा बनाते हैं क्योंकि वे आम लोगों से करीब 21 प्रतिशत ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ती हैं।

    पसीने की महक से खिंचते हैं

    सिर्फ सांस ही नहीं, हमारे शरीर से निकलने वाला पसीना भी मच्छरों को दावत देता है। जब हम कोई मेहनत वाला काम करते हैं या एक्सरसाइज करते हैं, तो पसीने के साथ लैक्टिक एसिड, यूरिक एसिड और अमोनिया जैसे कुछ तत्व बाहर निकलते हैं। मच्छरों को इन केमिकल्स की महक बहुत पसंद होती है। इसके अलावा, हमारी स्किन पर करोड़ों छोटे-छोटे बैक्टीरिया होते हैं। हर इंसान की त्वचा पर इन बैक्टीरिया का मेल अलग होता है, जिससे एक खास गंध पैदा होती है। रिसर्च के मुताबिक, जिन लोगों की स्किन पर खास तरह के बैक्टीरिया ज्यादा होते हैं, मच्छर उनकी तरफ पागलों की तरह खिंचे चले आते हैं।

    खून के प्रकार

    क्या आपको पता है कि मच्छरों का भी अपना एक पसंदीदा ‘मेन्यु’ होता है? वैज्ञानिकों ने पाया है कि ‘O’ ब्लड ग्रुप वाले लोग मच्छरों की सबसे पहली पसंद होते हैं। इन लोगों को ‘A’ ब्लड ग्रुप वालों के मुकाबले दोगुना ज्यादा मच्छर काटते हैं, जबकि ‘B’ ग्रुप वाले लोग इनके बीच में आते हैं। दरअसल, हमारे शरीर के जीन्स ही यह तय करते हैं कि हमारी त्वचा से कौन से केमिकल बाहर निकलेंगे। दुनिया में करीब 80 प्रतिशत लोग ऐसे होते हैं जिनके शरीर से निकलने वाले पसीने या स्राव से उनके ब्लड ग्रुप का पता चल जाता है। मच्छर इसी जानकारी के आधार पर उन पर हमला कर देते हैं।

    शरीर की गर्मी का असर

    मच्छर सिर्फ सूंघते ही नहीं, बल्कि वे रंगों को भी बहुत अच्छी तरह देख सकते हैं। उन्हें गहरे रंग जैसे काला, गहरा नीला और लाल रंग बहुत जल्दी नजर आते हैं। अगर आपने गहरे रंग के कपड़े पहने हैं, तो आप मच्छरों की नजर में आसानी से आ जाएंगे और वे आपको ढूंढ लेंगे। इसके साथ ही, मच्छर हमारे शरीर से निकलने वाली गर्मी को भी महसूस करते हैं। जब मादा मच्छर हमारे शरीर के करीब आती है, तो वह उन जगहों को ढूंढती है जहां खून की नसें त्वचा के बिल्कुल पास होती हैं। जब हम हिलते-डुलते हैं, तो शरीर की गर्मी और गंध तेजी से फैलती है, जिससे मच्छरों को शिकार करने में आसानी होती है।

    यह भी पढ़ें: हाथ और पैर दोनों से चलकर एक्सरसाइज कर रहे इंसान, इससे फायदा है या नुकसान?

    बचाव के तरीके

    मच्छरों के कहर से बचने के लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं। सबसे पहले, घर के बाहर निकलते समय हल्के रंग के और पूरी बाजू के कपड़े पहनना चाहिए क्योंकि गहरे रंग मच्छरों को जल्दी दिखाई देते हैं। घर के आस-पास कहीं भी पानी जमा न होने दें, क्योंकि ठहरे हुए पानी में ही मच्छर अपने अंडे देते हैं। सोने के समय मच्छरदानी का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित तरीका है। इसके अलावा, शाम के वक्त खिड़की-दरवाजे बंद रखें और शरीर पर नीम का तेल या बाजार में मिलने वाली मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम का इस्तेमाल करें। अगर आप पसीने से लथपथ हैं, तो नहाकर खुद को साफ कर लें क्योंकि पसीने की महक मच्छरों को न्योता देती है।