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सीएसजेएमयू की अंतरराष्ट्रीय पुस्तक को मिली वैश्विक पहचान, वेब ऑफ साइंस में हुई अनुक्रमित : प्रो. विनय

कानपुर। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शोध एवं नवाचार संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी। साथ ही साथ शिक्षकों और शोधार्थियों को उत्कृष्ट अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी। यह बातें शुक्रवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।

कुलपति ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा संपादित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक के वेब ऑफ साइंस के पुस्तक उद्धरण सूचकांक में अनुक्रमित होने पर सभी संपादकों और व्यवसाय प्रबंधन संस्थान के शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की वैश्विक शोध प्रतिष्ठा को नई मजबूती प्रदान करेगी।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन संस्थान के शिक्षकों द्वारा संपादित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक ‘वैश्विक चुनौतियों के लिए उद्यमशील समाधान : नवाचार, विकास और सततता’ का प्रकाशन यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान कैम्ब्रिज स्कॉलर्स पब्लिशिंग द्वारा किया गया है। इस पुस्तक को विश्व के प्रतिष्ठित शोध डेटाबेस वेब ऑफ साइंस के पुस्तक उद्धरण सूचकांक में भी अनुक्रमित किया गया है, जिसे शोध गुणवत्ता और वैज्ञानिक उद्धरण का विश्वसनीय वैश्विक मानक माना जाता है।

इस अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन के लिए विश्वभर से लगभग 140 शोध अध्याय प्राप्त हुए थे। कठोर शैक्षणिक समीक्षा के बाद केवल 24 उच्च गुणवत्ता वाले शोध अध्यायों का चयन प्रकाशन के लिए किया गया। यह उपलब्धि पुस्तक की उत्कृष्ट शैक्षणिक गुणवत्ता और वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण मानी जा रही है।

पुस्तक में उद्यमिता, नवाचार, सतत विकास, वित्तीय समावेशन, नैतिक नेतृत्व, संकर कार्य संस्कृति तथा उत्तरदायी प्रबंधन जैसे विषयों पर शोध आधारित और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। साथ ही आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के समन्वित मॉडल पर विशेष बल दिया गया है, जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों तथा भारत के विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

इस पुस्तक का संपादन व्यवसाय प्रबंधन संस्थान के निदेशक प्रो. सुधांशु पंडिया, डॉ. विवेक सिंह सचान, डॉ. संजीव कुमार सिंह तथा डॉ. मयंक जिंदल ने किया है। यह पुस्तक शोधार्थियों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।

 

 

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