HomeHealth & Fitnessतहसील अधिकारी बेपरवाह ,न्याय के लिए एडियां रगड़ रहे किसान 

तहसील अधिकारी बेपरवाह ,न्याय के लिए एडियां रगड़ रहे किसान 

मोहनलालगंज। मोहनलालगंज में तहसील अधिकारियों की लापरवाही से न्याय के लिए कई वर्षों से एडियां रगड़ रहे गरीब किसानो को आदेश के इंतजार में अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। लेकिन सम्पूर्ण समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पीड़ित किसानों को न्याय नही मिल पा रहा है। 

मोहनलालगंज में तमोरिया निवासी प्रमोद कुमार ने वरासत के लिए दो साल पूर्व आवेदन किया था। नायब तहसीलदार निगोहां के यहां सुनवाई भी पूरी हो चुकी है। लेकिन मुकदमे में आदेश नही किया जा रहा है। प्रमोद का आरोप है कि कई बार वह खुद नायब तहसीलदार से मिलकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं।

लेकिन कोई सुनवाई नही हो रही। थकहार कर पीड़ित प्रमोद ने सम्पूर्ण समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराई है। इसी तरह उत्तरगांव निवासी अखिलेश कुमार ने एसडीएम न्यायिक के यहां खतौनी में गड़बड़ी ठीक कराने के लिए मुकदमा किया था। 

सुनवाई पूरी होने के बाद ढाई माह पूर्व ही मामला आदेश के लिए सुरक्षित कर लिया गया। लेकिन अखिलेश का आरोप है कि अब तक मामले में आदेश नही किया गया। अखिलेश के मुताबिक तहसील जाने पर एसडीएम न्यायिक मिलते नही और पेशकार टालमटोल कर रहे हैं। जिसकी वजह से उन्हें न्याय नही मिल पा रहा है। परेशान हाल अखिलेश ने भी सम्पूर्ण समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन जिम्मेदारों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाए आरोपी रीडर को ही मामले की जांच सौंप दी है।

सुर्खियों में ‘दिल्ली दरबार’ कई वर्षों से जमी तिकड़ी की मर्जी से चल रही तहसील
मोहनलालगंज तहसील के दिल्ली दरबार की चर्चा इन दिनों सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चाएं जोर पकड़ रही है। सूत्रों की मानें तो तहसील के कुछ कर्मचारी और अधिकारी सरकारी आवास और कार्यालय होने के बावजूद इलाके की ही एक प्राइवेट बिल्डिंग में देर रात तक दरबार लगाकर सरकारी कामकाज निपटा रहे हैं।चर्चाएं तो यहां तक हैं कि इसी दरबार में कई प्रॉपर्टी डीलर भी महफिल में शामिल होते हैं। वही तहसील में कई वर्षों से जमे कुछ कर्मचारियों की तिकड़ी की मर्जी के बिना तहसील का कोई भी काम होना आसान नहीं रहता है। 

आरोप है कि तहसील के सारे महत्वपूर्ण कार्यों पर इस तिकड़ी ने कब्जा कर रखा है। अधिवक्ताओं की मानें तो अधिकारी भी इस तिकड़ी की रजामंदी लिए बगैर कोई कदम नहीं बढ़ाते हैं। जबकि तिकड़ी की नही सुनने वाले कर्मियों का महत्वहीन पटलों पर तबादला करा दिया जाता है। 

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