Homeदेश (National)20 से 30 साल की महिलाओं में बढ़ रही बांझपन की समस्या,...

20 से 30 साल की महिलाओं में बढ़ रही बांझपन की समस्या, जानिए कारण

भागदौड़ वाली लाइफस्टाइल और शरीर में आंतरिक बदलाव की वजह से कम उम्र की महिलाओं में हार्मोनल अंसतुलन और प्रजनन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जो स्वास्थ्य समस्याएं पहले 30 वर्ष की आयु के बाद देखी जाती थीं, वे अब 20 से 30 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में पाई जा रही हैं।

सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च में स्त्री रोग और आईवीएफ विशेषज्ञ प्रीति अरोड़ा धमीजा ने कहा, ‘महिलाओं के स्वास्थ्य में एक चिंताजनक बदलाव दिख रहा है। हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन से जुड़ी समस्या अब सामान्य आयु से कहीं पहले सामने आ रही है।’ उन्होंने इसके लिए ‘प्यूबर्टी’ के जल्दी आने को एक बड़ा कारण बताते हुए कहा कि कई लड़कियों को अब आठ-नौ साल की उम्र में ही मासिक धर्म शुरू हो जाता है, जिससे आगे चलकर ‘ओवेरियन रिजर्व’ (अंडाशय में अंडों की संख्या) में समय से पहले कमी आ सकती है।

यह भी पढ़ें: खाने के बाद 10 मिनट चलने से ब्लड शुगर होगा कंट्रोल, जानिए इसके पीछे का साइंस

खराब लाइफस्टाइल है मुख्य कारण

‘द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ’ में प्रकाशित अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि बेहतर पोषण के कारण यौवन की उम्र में लगातार कमी आ रही है और साथ-साथ मोटापे और पर्यावरणीय प्रभाव भी बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल शरीर के आंतरिक कारण ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि जीवनशैली की भी बड़ी भूमिका है।

डॉक्टर प्रीती धमीजा ने कहा, ‘आजकल युवतियां अत्यधिक तनावपूर्ण माहौल में बड़ी हो रही हैं, जहां नींद का कोई निश्चित समय नहीं है, स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, खान-पान की आदतें खराब हैं और शारीरिक सक्रियता कम है। इन सभी कारणों के चलते 20 से 30 वर्ष की कम उम्र की महिलाओं में मोटापा, पीसीओएस और मेटाबॉलिक संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहने से शरीर की हार्मोन प्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। हार्मोनल अंसुलन की वजन से महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर जूही भारती ने कहा, ‘चिकित्सीय रूप से अब हम 25 से 30 वर्ष की महिलाओं में ‘डिमिनिश्ड ओवेरियन रिजर्व’ (अंडाशय में अंडों की कमी) देख रहे हैं। यह रुझान पहले 35 वर्ष से अधिक की महिलाओं में अधिक देखा जाता था।’ उन्होंने कहा कि गर्भधारण करने की क्षमता को केवल उम्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य का प्रतिबिंब है।

यह भी पढ़ें: खाली पेट भिंडी वाला पानी पीने से शुगर होगा कंट्रोल, डाइटिशियन से समझिए

कैसे हार्मोनल इम्बैलेंस को ठीक करें?

सर गंगा राम अस्पताल की डॉक्टर भवानी शेखर ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, धूम्रपान और शराब का सेवन इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। हालांकि, उन्होंने राहत की बात यह बताई कि इन कारकों में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने सलाह दी है कि संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन के जरिए हार्मोनल संतुलन और प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments