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हर्रैया ओवरब्रिज की सुरंगों में हजारों मैना का बसेरा:स्थानीय व्यापारी भोर में देते हैं दाना-पानी, बन गई अनूठी मिसाल

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बस्ती जिले के हर्रैया ओवरब्रिज पर हजारों ‘बैंक मैना’ (गंगा मैना) ने अपना बसेरा बना लिया है। ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान जल-निकासी के लिए बनाई गई छोटी सुरंगों और सुराखों में इन पक्षियों ने अपने घोंसले बनाए हैं। यह घटना शहरी विकास के बीच वन्यजीवों के अनुकूलन का एक उदाहरण प्रस्तुत करती है। हर्रैया कस्बे के पास स्थित इस ओवरब्रिज पर सुबह होते ही हजारों पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती है। आमतौर पर नदियों के किनारों और मिट्टी के टीलों में घोंसले बनाने वाली बैंक मैना ने इस कंक्रीट के ढांचे को सुरक्षा के लिए चुना है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन से ऊंचाई पर होने के कारण ये सुरंगें पक्षियों और उनके अंडों को शिकारी जीवों से सुरक्षित रखती हैं। इस अनूठे सह-अस्तित्व में हर्रैया के स्थानीय व्यापारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कस्बे के व्यापारी प्रतिदिन सूर्योदय से पहले ओवरब्रिज के नीचे पहुंचते हैं। यमुना शर्मा, सूरज शर्मा, अमित कसौधन और दिनेश गुप्ता जैसे स्थानीय व्यापारी नियमित रूप से बाजरा, चावल, अनाज और पानी की व्यवस्था करते हैं। जैसे ही दाना बिखेरा जाता है, हजारों मैना भोजन के लिए नीचे उतर आती हैं। यह दृश्य स्थानीय लोगों और पक्षियों के बीच एक विशेष संबंध को दर्शाता है। स्थानीय पर्यावरणविदों का कहना है कि कंक्रीट के ढांचों में हजारों पक्षियों का यह बसेरा दर्शाता है कि सुरक्षित वातावरण मिलने पर वन्यजीव शहरी क्षेत्रों में भी अनुकूलन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, बैंक मैना आसपास के कृषि क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों का भक्षण करती हैं, जिससे किसानों को प्राकृतिक रूप से फसल सुरक्षा का लाभ मिलता है। हर्रैया का यह ओवरब्रिज अब केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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