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केरल के नए मुख्यमंत्री होगे वीडी सतीशन, सोमवार को शपथ ग्रहण, हाईकमान ने लगाई मुहर

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। लंबे समय से जारी राजनीतिक अटकलों और अंदरूनी मंथन के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने आखिरकार केरल के नए मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान कर दिया। पार्टी ने वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना है। इसके साथ ही कांग्रेस ने राज्य की राजनीति में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का स्पष्ट संकेत दिया है।

दिल्ली में हुई घोषणा के दौरान दीपा दासमुंशी, मुकुल वासनिक और अजय माकन सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री पद के लिए नामित वी.डी सतीशन सोमवार को शपथ ग्रहण करेंगे। राज्य के मुख्यमंत्री का मुद्दा सुलझने के बाद यूडीएफ के भीतर नए मंत्रिमंडल की संरचना को लेकर गहन चर्चा शुरू हो गई। सूत्रों के अनुसार, यह सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं कि सभी 20 मंत्री सतीशन के साथ शपथ लें, जिससे मंत्रिमंडल के चरणबद्ध विस्तार की संभावना समाप्त हो जाएगी और इसके बजाय पहले ही दिन पूर्ण पैमाने पर राजनीतिक शुभारंभ का विकल्प चुना जाएगा।

अंतिम दौर की चर्चा के समय कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल भी दिल्ली में मौजूद थे। फैसले से पहले उनकी राहुल गांधी के साथ अहम बैठक हुई। इसी बीच वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला को राहुल गांधी का फोन आया, जिसमें उन्हें बताया गया कि पार्टी नेतृत्व ने सतीशन के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है। 

कोच्चि जिले में जन्मे वीडी सतीशन इस महीने के आखिर में 62 वर्ष के हो जाएंगे। पेशे से वकील सतीशन ने 2001 में परावुर सीट से विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में सक्रिय प्रवेश किया था। इसके बाद उन्होंने विधानसभा में अपने प्रभावशाली भाषणों, तीखे व्यंग्य और मजबूत तथ्यों के सहारे अलग पहचान बनाई। वामपंथी दलों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने वाले नेताओं में उनका नाम तेजी से उभरा। 2021 के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की हार के बाद उन्हें विपक्ष का नेता बनाया गया था। शुरुआत में उन्हें समझौता उम्मीदवार माना गया, लेकिन उन्होंने इस भूमिका को अपनी राजनीतिक ताकत में बदल दिया। 

सोना तस्करी मामला, एआई कैमरा विवाद और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर उन्होंने पिनाराई विजयन सरकार को लगातार घेरा। सतीशन की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि वे कांग्रेस के पारंपरिक ‘ए’ और ‘आई’ गुटों से पूरी तरह नहीं जुड़े रहे। इसी वजह से उन्हें युवा विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का व्यापक समर्थन मिला। हालांकि पार्टी के भीतर कुछ लोग उन पर फैसले केंद्रीकृत रखने का आरोप भी लगाते हैं।

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