बिजनौर। जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन, जहां से पूरे जिले की विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार होती है, उसी के प्रवेश द्वार पर स्थित सामुदायिक शौचालय खुद अपने ‘विकास’ की बाट जोह रहा है। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) द्वारा निर्मित यह पुरुष शौचालय देखरेख के अभाव में वर्तमान में बदहाली का पर्याय बन चुका है।
शौचालय की स्थिति इतनी खस्ता है कि इसके पास से गुजरना भी दूभर हो गया है। चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है और नियमित सफाई न होने के कारण भीषण दुर्गंध उठ रही है। फोटो में साफ देखा जा सकता है कि फर्श से लेकर दीवारों तक की स्थिति जर्जर हो चुकी है। रख-रखाव के अभाव में शौचालय का मूल उद्देश्य ही समाप्त होता दिख रहा है।
शौचालय का उपयोग स्वच्छता के बजाय अब असामाजिक गतिविधियों के लिए अधिक होने लगा है। स्थानीय लोगों और राहगीरों का आरोप है कि शाम ढलते ही यहाँ शराब पीने वालों का जमावड़ा लग जाता है। शौचालय परिसर के भीतर और आसपास शराब के खाली क्वार्टर, डिस्पोजेबल गिलास और प्लास्टिक की थैलियां बिखरी पड़ी हैं, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही हैं।
विकास भवन के गेट पर इस तरह की स्थिति न केवल शहर की छवि खराब कर रही है, बल्कि यहाँ आने वाले लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी सवालिया निशान लगा रही है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जिला मुख्यालय पर ही डूडा की यह कार्यप्रणाली लापरवाही को उजागर करती है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल इस शौचालय की सुध ले। यहाँ नियमित सफाईकर्मी की तैनाती की जाए और पुलिस प्रशासन को भी शाम के समय गश्त बढ़ानी चाहिए ताकि इसे शराबियों का अड्डा बनने से रोका जा सके।












