लखनऊ, । प्रदेश में पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य, परख के निष्कर्ष, टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज अध्ययन और निपुण भारत मिशन के अनुभवों एवं शैक्षणिक रणनीति पर मंथन किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के तत्वावधान में ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग’ एवं टीएलपीएस उत्तर प्रदेश रिपोर्ट-2025 का विमोचन अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने किया।
शहर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश में निपुण भारत मिशन की प्रगति, अब तक हुए शिक्षा सुधारों, कक्षा-कक्ष में आए बदलाव तथा गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई रणनीतियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस दौरान परख के निष्कर्ष, शिक्षा सुधारों के प्रमुख आयाम, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण की 10 प्रमुख शिक्षण पद्धतियों, 15 कैच-अप रणनीतियों, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, अकादमिक कैलेंडर तथा निपुण 2 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे-2025 उत्तर प्रदेश रिपोर्ट में कक्षा 1 एवं 2 में भाषा और गणित शिक्षण की वर्तमान स्थिति, कक्षा का वातावरण, शिक्षण समय का उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा निपुण भारत मिशन के प्रभाव का भी विश्लेषण किया गया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि शिक्षा सुधार केवल नीतियां बनाने से संभव नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक शिक्षक द्वारा कक्षा-कक्ष में अपनाई जाने वाली शिक्षण पद्धति से परिवर्तन आएगा। किसी भी शिक्षण प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण आधार बच्चों का जुड़ाव है। उन्होंने एक जुलाई से प्रारंभ हो रहे स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने के लिए सभी शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा बाल वाटिका से तथा छह वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा विद्यालय से बाहर नहीं रहना चाहिए। निपुण उत्तर प्रदेश का दायरा अब कक्षा 1 और 2 से बढ़ाकर कक्षा 3 से 5 तक किया जा रहा है। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुवेर्दी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।












