लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन पर बिजली कर्मचारियों एवं अत्यल्प मानदेय पर कार्यरत संविदा कर्मियों की समस्याओं के संबंध में शासन को भ्रामक एवं तथ्यहीन जानकारी भेजकर गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह प्रवृत्ति न केवल कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध है,बल्कि शासन के समक्ष वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास भी है। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि संघर्ष समिति द्वारा कर्मचारियों एवं संविदा कर्मियों की समस्याओं के संबंध में भेजे गए पत्रों पर जब शासन अथवा ऊर्जा मंत्री कार्यालय द्वारा आख्या मांगी जाती है, तब पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन वास्तविक समाधान करने के बजाय भ्रामक उत्तर भेजकर प्रकरण को समाप्त करने का प्रयास करता है। संघर्ष समिति ने बताया कि इसका ताजा उदाहरण ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मियों को मुख्यमंत्री द्वारा घोषित प्रस्तावित आउटसोर्स निगम में शामिल किए जाने का है। इस संबंध में संघर्ष समिति द्वारा प्रबंधन को पत्र भेजा गया था। शासन को भेजी गई आंख्या में प्रबंधन ने कहा है कि “सिस्टम में सुधार एवं तकनीकी पुनर्गठन (वर्टिकल व्यवस्था) के कारण आवश्यकता के अनुसार ही संविदा कर्मियों को रखा जा रहा है तथा यह व्यवस्था तकनीकी दृष्टि से आवश्यक है।”
संविदा कर्मियों की छंटनी के मुद्दे पर शासन को गुमराह किया जा रहा :संघर्ष समिति
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