ब्रोकली की खेती: भारत के किसान सालों से पारंपरिक गेहूं की खेती करते आ रहे हैं, लेकिन आज के इस मुश्किल दौर में जहां खेती में लागत काफी बढ़ गई हैं, ऐसे में इन फसलों के भरोसे रहकर बड़ी कमाई करना काफी मुश्किल भरा काम हैं. गातार बढ़ती लागत और बिगड़ते मौसम के कारण किसानों को सही मुनाफा नहीं मिल पाता. ऐसे में देश के किसानों के लिए अपनी कमाई को दोगुना करने का एक अच्छा मौका आया है. किसान अब पारंपरिक फसलों को छोड़कर विदेशी सब्जियों, जैसे कि ब्रोकली और रंग-बिरंगी शिमला मिर्च की खेती कर सकते हैं. इन फसलों की मांग बाजार में बहुत ज्यादा है इसलिए इनसें मुनाफा भी तगड़ा मिलता है.
ब्रोकली से कैसे होगी दोगुनी कमाई
ब्रोकली देखने में बिल्कुल फूलगोभी जैसी होती है, लेकिन इसका रंग गहरा हरा होता है. आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर बहुत जागरूक हो गए हैं. अक्सर जिम जाने वाले लोग और डॉक्टर भी ब्रोकली खाने की सलाह देते हैं यही कारण है कि बाजारों, होटलों और बड़े सुपरमार्केट्स में इसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है.
ब्रोकली की खेती मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में की जाती है. अक्टूबर और नवंबर का महीना इसके पौधे लगाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इसकी सीधी बुआई करने के बजाय पहले नर्सरी में इसके पौधे तैयार करके खेत में लगाना ज्यादा ठीक रहता है. ब्रोकली की फसल मात्र 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है, और सामान्य फूलगोभी के मुकाबले बाजार में ब्रोकली की कीमत दो से तीन गुना ज्यादा मिलती है. अगर आप एक एकड़ में भी ब्रोकली लगाते हैं, तो बहुत कम लागत में लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं.
रंग-बिरंगी शिमला मिर्च से बंपर मुनाफा
आप ने बाजारों में हरी शिमला मिर्च तो खूब देखी है, लेकिन अब बाजारों में लाल और पीली शिमला मिर्च की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है. सबसे अच्छी बात यह है कि यह आम हरी शिमला मिर्च के मुकाबले बहुत महंगे दामों पर बिकती है. लाल और पीली शिमला मिर्च की खेती करने के लिए पॉलीहाउस या शेडनेट का तरीका सबसे बेहतरीन माना जाता है. पॉलीहाउस के अंदर मौसम को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे फसल खराब नहीं होती. साथ ही इसकी खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी और अच्छे जल निकास की जरूरत होती है. रंग-बिरंगी शिमला मिर्च बाजार में ₹100 से लेकर ₹200 प्रति किलोग्राम तक के भाव में आसानी से बिक जाती है. एक बार पौधा लगाने के बाद इससे कई महीनों तक लगातार फल मिलते रहते हैं.












