लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक बयान को लेकर संसद में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने सदन में असंसदीय और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर बिना किसी ठोस सबूत के गंभीर आरोप लगाए हैं।
अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि इस मामले को जांच के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि राहुल गांधी को सदन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया जाना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है।
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इडियट-अंधभक्त शब्दों पर बढ़ा विवाद
BJP सासंद के अनुसार, 29 जुलाई को एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए लोगों को स्टूडेंट्स, इडियट्स और अंधभक्त जैसी श्रेणियों में बांटा। अनुराग ठाकुर का आरोप है कि इन शब्दों का इस्तेमाल सरकार के समर्थकों और नागरिकों के लिए किया गया, जो संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उसी समय इन शब्दों पर आपत्ति जाती और उन्हें कार्यवाही से हटाने की मांग की। आरोप है कि इसके बावजूद राहुल गांधी ने इन शब्दों का दोबारा इस्तेमाल किया।
संसदीय नियम तोड़ने का लगाया आरोप
अनुराग ठाकुर ने अपने नोटिस में कहा है कि इडियट और अंधभक्त जैसे शब्द लोकसभा की असंसदीय शब्दवाली में शामिल हैं। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन के नियमों का उल्लंघन करते हुए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। साथ ही उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए लेकिन उनके समर्थन में कोई दस्तावेज या विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किया। BJP सांसद का कहना है कि संसदीय नियमों के तहत किसी मंत्री पर आरोप लगाने से पहले अध्यक्ष और संबंधित मंत्री को पूर्व सूचना देना आवश्यक होता है, ताकि आरोपों की जांच और जवाब देने का अवसर मिल सके।
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विशेषाधिकार समिति से जांच की मांग
अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजकर विस्तृत जांच कराई जाए। उनका कहना है कि राहुल गांधी का आचरण सदन की गारिमा और संसदीय परंपराओं के खिलाफ है, इसलिए इस मामले में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं कि वह इस नोटिस पर आगे क्या कदम उठाते हैं।












