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 क्या है बलूचिस्तान का इतिहास और पाकिस्तान के लिए यह प्रांत क्यों अहम है?

बलूचिस्तान”:”रिपब्लिक ऑफ़ बलूचिस्तान” के नाम से जारी बलोच नेता मीर यार बलोच के एक वायरल ट्वीट ने तहलका मचा दिया है, जिसमें प्रांत के 85 प्रतिशत हिस्से पर कब्जे की बात कही गई है। इसके साथ ही बलूचिस्तान को आजाद देश घोषित कर दिया है। इस नए देश के लिए बलोचों ने अलग प्रशासनिक व्यवस्था, नया राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और बलोची फालूस के नाम से एक नई मुद्रा की घोषणा भी कर दी है। वायरल हो रहे इस दस्तावेज़ में दावा किया गया है कि बलूच अलगाववादियों ने पाकिस्तान से आज़ादी का ऐलान कर दिया है। हालांकि इन दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बलूचिस्तान को एक बार फिर दुनिया में बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। 

 

बलूचिस्तान क्यों है इतना खास?

भारत से जब पाकिस्तान अलग हुआ तो उसके हिस्से बलूचिस्तान आया, जो क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। बलूचिस्तान अगर पाकिस्तान से अलग हो जाता है तो उसके वजूद पर भी आंच आ सकती है। इतना बड़ा होने के बावजूद, बलूचिस्तान की आबादी सबसे कम है और यह सबसे कम विकसित इलाकों में से एक है। ईरान और अफ़गानिस्तान की सीमा से लगे इस प्रांत का रणनीतिक महत्व बहुत ज़्यादा है। बलूचिस्तान में तांबा, सोना, प्राकृतिक गैस, कोयला और दुर्लभ खनिजों जैसे प्राकृतिक संसाधन भरपूर हैं। सबसे बड़ी बात है इसकी भौगोलिक स्थिति, यह अरब सागर के किनारे स्थित है और इसी वजह से यह दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और मध्य एशिया को जोड़ने वाला एक अहम गेटवे है।

बलूचिस्तान में क्यों भड़का विद्रोह?
बलूचिस्तान में विद्रोह की जड़ें साल 1947 में पड़ीं, जब भारत और पाकिस्तान अलग हुए थे। तब बलूच नेताओं ने इस इलाके को पाकिस्तान में शामिल किए जाने का विरोध किया था। बलूचिस्तान में कई बार विद्रोह हुए हैं, जिसमें 1940 के दशक के आखिर में, 1950, 1960 और 1970 के दशकों में और फिर 2000 के दशक की शुरुआत से जो विद्रोह हुआ वो आज भी जारी है। बलूचिस्तान में विद्रोह की वजह पाकिस्तान के द्वारा स्वायत्तता, संसाधनों पर नियंत्रण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन शामिल है।

बलूचिस्तान का क्या है इतिहास
भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय आज के बलूचिस्तान में चार बड़ी रियासतें थीं, जिनका नाम कलात, मकरान, लास बेला और खारन था। इन चारों रियासतों में  कलात सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली रियासत थी। कलात को खान, मीर अहमद यार खान ने  11 अगस्त 1947 को एक आजाद देश घोषित कर दिया। ब्रिटिश अधिकारियों ने कलात को मान्यता दी और यह रियासत शुरू में भारत और पाकिस्तान दोनों से बाहर रही थी। इससे इतर इसके पड़ोसी रियासतों मकरान, लास बेला और खारन ने पाकिस्तान में शामिल होने का फैसला कर लिया और कलात अलग थलग पड़ गया। 

कलात ने भारत का समर्थन पाने की कोशिश की और उसके भारत में विलय की संभावना पर बातचीत हुई थी, लेकिन ऐसा कोई समझौता नहीं हो पाया और 227 दिनों तक आजाद और संप्रभु रहने के बाद 20 मार्च 1948 में कलात पाकिस्तान का हिस्सा बन गया और इसका नाम बलूचिस्तान पड़ गया। ​स्टेट ऑफ कलात ने पाकिस्तान के साथ इस शर्त पर विलय किया था ताकि पाकिस्तान की सरकार उनके आतंरिक मामले में दखल नहीं देगी। लेकिन हुआ इसका उल्टा पाकिस्तान अबतक बलपूर्वक बलूचिस्तान पर अपना पूरा नियंत्रण करने की कोशिश करता रहता है।

बलूचिस्तान में क्यों भड़का विद्रोह
बलूचिस्तान, पाकिस्तान के सबसे लंबे समय से चल रहे आंतरिक संघर्ष का केंद्र रहा है। दशकों तक पाकिस्तान के बाकी हिस्सों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने के बावजूद, बलूचिस्तान की लगभग 70% आबादी गरीबी में जी रही है। दशकों से, बलूच राष्ट्रवादी समूहों ने पाकिस्तान की केंद्र सरकार पर स्थानीय समुदायों की अनदेखी करते हुए प्रांत के संसाधनों का शोषण करने का आरोप लगाया है। इसी वजह से लंबे समय से अलगाववादी विद्रोह चल रहा है। बलूच लिबरेशन आर्मी जैसे उग्रवादी और अलगाववादी संगठन अक्सर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, बुनियादी ढांचे पर सुनियोजित हमले करते हैं। 

चीन के लिए बलूचिस्तान इतना अहम क्यों ?
बलूचिस्तान में चीन की दिलचस्पी सीधे तौर पर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से जुड़ी है, जो चीन के महत्वाकांक्षी प्रमुख प्रोजेक्ट्स में से एक है। 65 अरब डॉलर से ज़्यादा कीमत वाले CPEC का मकसद हाईवे, रेलवे, एनर्जी प्रोजेक्ट्स और बंदरगाहों के नेटवर्क के ज़रिए पश्चिमी चीन को अरब सागर से जोड़ना है। चीन के लिए अहम ग्वादर बंदरगाह, बलूचिस्तान के मकरान तट पर अरब सागर के पास स्थित एक गहरा बंदरगाह है। यह स्थान वैश्विक समुद्री व्यापार का एक प्रमुख केंद्र है, यह ग्लोबल शिपिंग लेन तक सीधा रास्ता देता है और मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) पर निर्भरता कम करता है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त और सबसे संवेदनशील समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक है।

बलूचिस्तान आजाद मुल्क बन सकता है?
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में स्वीकार किया था कि बलूच विद्रोही अब अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसा पाकिस्तानी सेना के पास भी नहीं है। खुद पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि बलूचिस्तान के विद्रोह से निपटना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। विद्रोह के मौजूदा हालात और पाकिस्तान की सैन्य ताकत को देखते हुए बलूचिस्तान के तुरंत एक आजाद मुल्क बनने की संभावना कम दिखती है, लेकिन, यह असंभव नहीं है। बलूच समय समय पर अलग आजाद मुल्क की घोषणा करते रहते हैं। लेकिन, अभी तक उनको मान्यता नहीं मिली है।​

 

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