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देश में 2024 में 2.5 करोड़ बच्चों का जन्म, यह रिकॉर्ड सरकार के किस काम आता है?

साल 2024 में भारत में 2.5 करोड़ (2,54,73,389) बच्चों के जन्म का रजिस्ट्रेशन हुआ है, जो 2023 के मुकाबले ज्यादा है। वहीं, इसी दौरान 89.3 लाख (89,38,301) लोगों की मौत भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज की गई। ये आंकड़े रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) की ओर से जारी सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) 2024 की रिपोर्ट में सामने आए हैं। जुलाई 2026 में जारी इस रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन किस स्तर पर हो रहा है और इसकी तस्वीर कैसी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में करीब हर 100 में से 99 बच्चों का जन्म दर्ज किया गया, यानी जन्म पंजीकरण का आंकड़ा 99.1% तक पहुंच गया। वहीं, हर 100 में से करीब 99 मौतों का भी रिकॉर्ड दर्ज हुआ, जिससे मृत्यु पंजीकरण 99.4% पर पहुंच गया। यह अब तक के सबसे अच्छे स्तरों में से एक माना जा रहा है। देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जन्म पंजीकरण 100% रहा, जबकि 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मृत्यु पंजीकरण में भी 100% का आंकड़ा हासिल कर लिया।

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रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?

CRS रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में शिशु मृत्यु के मामलों में कमी आई है। 2023 में जहां 1,45,992 नवजात बच्चों की मौत दर्ज हुई थी, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 1,20,992 रह गई। सिर्फ शिशु मृत्यु ही नहीं, स्टिल बर्थ के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई। 2023 में यह आंकड़ा करीब 1.01 लाख था, जो 2024 में घटकर 81 हजार 117 रह गया।

रिपोर्ट में जन्म के समय लिंगानुपात के आंकड़े भी जारी किए गए हैं। देश में हर 1,000 लड़कों पर 933 लड़कियों का जन्म दर्ज हुआ। इस मामले में अरुणाचल प्रदेश सबसे आगे रहा, जहां हर 1,000 लड़कों पर 1,050 लड़कियों का जन्म हुआ। वहीं नागालैंड सबसे पीछे रहा, जहां हर 1,000 लड़कों पर सिर्फ 806 लड़कियां पैदा हुईं।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में दर्ज हुए कुल जन्मों में 57.1% बच्चे शहरों में और 42.9% गांवों में पैदा हुए। अच्छी बात यह है कि करीब 79.4% बच्चों का जन्म अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में हुआ। इसका मतलब है कि अब पहले के मुकाबले ज्यादा महिलाएं अस्पताल में प्रसव करा रही हैं।

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यह रिकॉर्ड सरकार के किस काम आता है?

आप सोच रहे होंगे कि इतने सारे बच्चों के जन्म और इस डेटा से सरकार को क्या फायदा? दरअसल, यह डेटा सरकार के लिए ‘अलादीन के चिराग’ जैसा है:

  • योजनाएं बनाने में आसानी: इस डेटा की मदद से सरकार को पता चलता है कि आने वाले समय में देश को कितने स्कूलों, अस्पतालों, और नौकरियों की जरूरत पड़ने वाली है। सामाजिक और आर्थिक प्लानिंग सटीक हो जाती है।
  • सटीक बजट और सुविधाएं: इसके जरिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालयों को यह समझने में मदद मिलती है कि मां और बच्चे के पोषण के लिए चल रही योजनाएं कितनी सफल हो रही हैं।
  • लोकल लेवल पर विकास: जिला स्तर, ग्राम पंचायतों और नगर निगमों को अपने इलाके की आबादी का सटीक पता चलता है, जिससे वे पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी जरूरतें बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं।
  • घोटाले और फर्जीवाड़े पर रोक: 2023 के नए संशोधन के बाद बने नेशनल और स्टेट डेटाबेस से सरकारी रिकॉर्ड्स को तुरंत अपडेट किया जा सकता है। इससे सरकारी योजनाओं (जैसे राशन, पेंशन आदि) का लाभ बिना किसी देरी और बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे सही हकदार तक पहुंचाया जा सकता है।

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