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8.93 करोड़ लाभार्थी, 36 राज्य और UT कवर, कैसे काम करता है पोषण ट्रैकर?

भारत बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत पोषण अभियान चलाता है। साल 2018 से अब तक, इस पोषण योजना ने कई पड़ाव देखे हैं। यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन चलाया जा रहा है। यह योजना अपने तय लक्ष्यों को हासिल कर पा रही है या नहीं, इसे ट्रैक करने के लिए सरकार ने इसे डिजिटल हथियार के तौर पर पेश किया है।

भारत सरकार का कहना है कि इस मोबाइल ऐप ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के काम को आसान बना दिया है और पोषण सेवाओं की निगरानी अब रीयल-टाइम में हो रही है। मई 2026 तक पूरे 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू कर दिया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर 8.93 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी रजिस्टर्ड हैं।

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कैसे काम कर करता है पोषण ट्रैकर?

पोषण अभियान के तहत चलाए जा रहे इस ट्रैकर ने पहले की मैनुअल व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। अब आंगनवाड़ी वर्कर स्मार्टफोन से तुरंत डेटा डाल सकती हैं, जिससे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं और किशोरियों की पोषण स्थिति पर नजर रखी जा सकती है।

पोषण ट्रैकर क्या है?

पोषण अभियान की शुरुआत मार्च 2018 में हुई थी। बजट 2021-22 में मिशन पोषण 2.0 के तहत इसे शामिल किया गया। पोषण ट्रैकर मार्च 2021 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन ने लॉन्च किया। यह आंगनवाड़ी सेवाओं की डिजिटल निगरानी का मुख्य टूल है। आंगनवाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवा वितरण, लाभार्थी कवरेज और बच्चों के विकास की निगरानी का पूरा डेटा इस ऐप में स्टोर किया जाता है।

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किनके लिए राहत है यह ऐप?

पहले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 11 मैनुअल रजिस्टर भरने पड़ते थे। योजनाएं कैसी हैं, लोगों तक कैसे पहुंचे, किसको इसका लाभ मिला, ऐसे कुछ बुनियादी सवालों को सही वक्त पर किसी एक पोर्टल पर मुहैया नहीं काराया जाता था।

पोषण योजना के लिए जरूरी क्यों, कैसे काम करता है?

AADHAAR आधारित वेरिफिकेशन होने की वजह से यह ट्रैकर, फर्जी लाभार्थियों तक लाभ नहीं पहुंचने देता है। फंड, सही और जरूरतमंद तक पहुंचता है। ट्रैकर ऐप में चेहरा पहचानने के लिए ‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम’ है, जिसके जरिए सेवाओं की सही डिलीवरी हो जाती है। होम विजिट शेड्यूलर भी इस ट्रैकर में है। 23 होम विजिट का ऑटो शेड्यूल है। उम्र के हिसाब से काउंसलिंग चुनने का अधिकार भी यह ऐप देता है। पोषण कैलकुलेटर भी ऐप में है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय नियमों के हिसाब से ही बच्चों की लंबाई, वजन की सही जांच होती है। ऐप में ‘अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन’ (ECCE) कंटेट भी है। इसमें 249 वीडियो, 190 वॉइस नोट्स और 159 PDF बच्चों के लिए हैं। अगर पोषण योजना में कहीं धांधली दिखे, लोगों तक सुविधाएं न पहुंचे तो टोल फ्री नंबर 1515 पर कॉल कर सकते हैं। सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन दिए गए हैं और इंटरनेट खर्च भी सरकार उठाती है। ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस भी हर केंद्र पर उपलब्ध हैं।

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कितने लोगों तक पहुंच रहा पोषण योजना का लाभ?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 तक 8.93 करोड़ लाभार्थी रजिस्टर्ड हैं। इनमें बच्चे, किशोरियां, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं शामिल हैं। सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम (SNP) के तहत 5.5 करोड़ लाभार्थियों को कम से कम 15 दिन और 5.17 करोड़ को 21 दिन तक पोषण आहार दिया जा चुका है। 7.7 करोड़ बच्चों की पोषण स्थिति के आंकड़े भी मंत्रालय के पास हैं। शून्य से पांच साल के 6.3 करोड़ बच्चों पर नजर रखी गई, जो रजिस्टर्ड बच्चों का करीब 94 प्रतिशत है।

WHO ने इस योजना पर क्या कहा है?

WHO ने पोषण ट्रैकर को बेहतरीन न्यूट्रिशन डेटा सिस्टम बताया। UNICEF ने भी इसकी तारीफ की है। साल 2023 में G20 मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस में इस ऐप को दिखाया गया। अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री पुरस्कार और सितंबर 2024 में नेशनल अवॉर्ड फॉर ई-गवर्नेंस (गोल्ड) मिल चुका है।

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