नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बुनियादी ढांचे की मांग को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ह्यअर्बन चैलेंज फंडह्ण (यूसीएफ) की गाइडलाइन्स लॉन्च की हैं। इस पहल का उद्देश्य शहरों को पारंपरिक अनुदान आधारित मॉडल से बाहर निकालकर उन्हें बाजार आधारित वित्तपोषण की दिशा में ले जाना है, ताकि वे आत्मनिर्भर और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बन सकें।
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को कर्तव्य भवन में इस फंड और इसके अंतर्गत क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम का शुभारंभ किया। इस दौरान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
मंत्री ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड शहरी विकास के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव लाएगा। यह केवल अनुदान देने की योजना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के माध्यम से बड़े निवेश को आकर्षित करने और शहरों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि ह्यविकसित भारत 2047ह्ण का लक्ष्य तभी संभव है, जब शहर आर्थिक विकास और नवाचार के केंद्र बनें।
उन्होंने बताया कि पहले की योजनाओं जैसे अमृत, स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी मिशन ने बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है, लेकिन अब जरूरत शहरों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाने की है। यह फंड पुराने शहरी क्षेत्रों के पुनर्विकास, शहरी परिवहन, अंतिम मील कनेक्टिविटी, जल आपूर्ति, स्वच्छता और जलवायु अनुकूल परियोजनाओं को समर्थन देगा।
सरकार ने इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक 1 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता का लक्ष्य रखा है। इसमें से 90 हजार करोड़ रुपये परियोजनाओं के लिए, 5 हजार करोड़ रुपये क्षमता निर्माण के लिए और 5 हजार करोड़ रुपये गारंटी योजना के लिए निर्धारित किए गए हैं।
फंडिंग के ढांचे के तहत किसी परियोजना की कुल लागत का अधिकतम 25 प्रतिशत केंद्र सरकार देगी, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत राशि बाजार स्रोतों जैसे बैंक ऋण, बॉन्ड या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से जुटानी होगी। शेष राशि राज्य और स्थानीय निकायों द्वारा दी जाएगी।
यह योजना खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों को वित्तीय संसाधनों तक पहुंच दिलाने में मदद करेगी। इसके तहत गारंटी कवर प्रदान कर बैंकों का जोखिम कम किया जाएगा, जिससे शहरों को आसानी से निवेश मिल सकेगा और शहरी विकास को नई गति मिलेगी।











