नई दिल्ली। एक समय पर सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल करने वाला देश भारत अब दुनिया को टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट करने वाला देश बन गया है। दरअसल भारत की स्वदेशी 4G और 5G टेक्नोलॉजी को ग्लोबल मार्केट में उतार दिया गया है। इतना ही नहीं जापान, तंजानिया और श्रीलंका जैसे कई देशों में इसके ट्रायल भी शुरू हो चुके हैं। गौर करने वाली बात है कि भारत सरकार C-DOT यानी कि सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। अमेरिका और यूरोप जैसे देश तकनीक के लिए एक समय पर चीन पर निर्भर हुआ करते थे लेकिन अब वे सुरक्षित विकल्पों की तलाश में भारतीय तकनीक पर भरोसा जता रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट में भारतीय 5G का आगाज
बेंगलुरु स्थित तेजस नेटवर्क्स ने स्वदेशी 5G का ग्लोबल ट्रायल शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबित जापान, भूटान, श्रीलंका, तंजानिया और युगांडा जैसे देशों में भारतीय 4G-5G नेटवर्क के ट्रायल सफलतापूर्वक चल रहे हैं। हाल ही में दक्षिण एशियाई ऑपरेटर के साथ भी परीक्षण पूरा किया गया है। भूटान पहले से ही भारतीय टेलिकॉम उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है। गौर करने वाली बात है कि अब भारत के पास अपना रेडियो एक्सेस नेटवर्क यानी कि RAN और कोर प्रोडक्ट्स हैं, जिनकी ओर दुनिया भर के मोबाइल ऑपरेटर्स आकर्षित हो रहे हैं।
चीन का विकल्प बन रही भारतीय टेक्नोलॉजी
इस समय भारतीय टेक्नोलॉजी को सबसे ज्यादा फायदा वैश्विक परिस्थितियों से मिल रहा है। दरअसल अमेरिका और यूरोप जैसे देश सुरक्षा कारणों से चीनी कंपनियों के उपकरणों को अपने नेटवर्क से हटा रहे हैं। इस गैप को भरने के लिए भारतीय कंपनियां सबसे पसंदीदा बनकर उभरी हैं।
गौरतलब है कि तेजस नेटवर्क्स ने जापान की प्रसिद्ध कंपनियों NEC और रकुटेन (Rakuten) के साथ हाथ मिलाया है। इससे भारतीय टेक्नोलॉजी तेजी से चीनी का विकल्प बनेगी। इससे निर्यात में फायदा होने के साथ-साथ ग्लोबल स्तर पर भारत की तकनीकी छवि भी मजबूत होगी।
6G की तैयारी में देश
भारतीय तकनीक की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण BSNL है। टाटा समूह यानी कि TCS और तेजस ने मिलकर BSNL के लिए लगभग 1 लाख स्वदेशी 4G साइट्स तैयार की हैं, जिन्हें भविष्य में आसानी से 5G में बदला जा सकता है। यह अब अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है। कंपनी ने भविष्य की तैयारियों के लिए एक वायरलेस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी बनाया है। यहां 5G एडवांस और 6G टेक्नोलॉजी पर रिसर्च शुरू हो गई है













