अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अगर ईरान युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत करना चाहता है तो वह वाशिंगटन से संपर्क कर सकता है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘द संडे ब्रीफिंग’ में इंटरव्यू देते हुए कहा, ‘अगर वे बात करना चाहते हैं तो हमारे पास आ सकते हैं या हमें फोन कर सकते हैं। फोन तो है न। हमारे पास अच्छी और सुरक्षित लाइनें हैं।’
ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध बहुत जल्द खत्म हो जाएगा और इस संघर्ष में अमेरिका जीत हासिल करेगा। उन्होंने कहा, ‘ईरान से जिन लोगों से हम बात कर रहे हैं, उनमें कुछ बहुत समझदार हैं, कुछ नहीं हैं। मुझे उम्मीद है कि ईरान स्मार्ट फैसला लेगा।’
यह भी पढ़ें: ट्रंप ने बताई एक-एक बात, PM मोदी ने भी किया पोस्ट, कौन है डिनर पार्टी का हमलावर?
युद्ध कब शुरू हुआ?
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे। ट्रंप ने शनिवार को अपने मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकोफ और दामाद कुश्नर की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी थी। यह फैसला ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के पाकिस्तान से लौटने के बाद आया, जिससे बातचीत की उम्मीदों पर झटका लगा था।
अरागची पाकिस्तान लौट आए
हालांकि, रविवार को अरागची पाकिस्तान लौट आए। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की और पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए ‘व्यावहारिक ढांचा’ बनाने पर चर्चा की।
तेहरान की सेमी-ऑफिशियल न्यूज एजेंसी तस्नीम के अनुसार, अरागची की ये बातचीत परमाणु मुद्दे से जुड़ी नहीं है। इसमें शामिल मुद्दे हैं-
-
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नया कानूनी शासन लागू करना
-
मुआवजा मिलना
-
दोबारा सैन्य हमलों की गारंटी न देने का वादा
-
नौसेना ब्लॉकेड हटाना
ईरान के लिए क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने राजदूतों की यात्रा रद्द कर दी क्योंकि यात्रा बहुत महंगी और समय लेने वाली थी। उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को ‘काफी नहीं’ बताया। ट्रंप के अनुसार, ‘ईरान ने बहुत कुछ ऑफर किया, लेकिन पर्याप्त नहीं।’
यह भी पढ़ें: डिनर के दौरान जोरदार गोलीबारी से मचा हड़कंप, बाल-बाल बचे डोनाल्ड ट्रंप
इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का एक दौर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर कालिबाफ के नेतृत्व में हुआ था लेकिन उसमें कोई समझौता नहीं हो सका।
ट्रंप का मानना है कि ईरान को समझदारी से काम लेना चाहिए, ताकि युद्ध जल्दी खत्म हो और अमेरिका मजबूत स्थिति में रहे।












